Bhopal nawab property भोपाल की पूर्व रियासत से जुड़ी जमीनों को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। मामला आफताब जहां बेगम की बेहटा क्षेत्र स्थित 30.55 एकड़ जमीन की बिक्री से जुड़ा है। आरोप है कि पाकिस्तान निवासी होने के तथ्य को छिपाकर करोड़ों रुपये की संभावित कीमत वाली जमीन का सौदा किया गया। अब शत्रु संपत्ति के तौर पर दर्ज की गई संपत्तियों पर हुई कार्रवाई और नवाब परिवार की अतिरिक्त जमीनों की स्थिति की जांच की मांग उठी है।
30.55 एकड़ जमीन का 30.55 लाख में सौदा
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक 31 मई 1994 को आफताब जहां बेगम ने बेहटा क्षेत्र की 30.55 एकड़ जमीन एक सहकारी गृहनिर्माण संस्था को 30.55 लाख रुपये में बेच दी थी। इस सौदे के समय 1.55 लाख रुपये चेक के जरिए लिए गए थे। बाकी 29 लाख रुपये चार किस्तों में लेने का समझौता बताया गया था।इस जमीन को लेकर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि वर्ष 1959 के राजस्व रिकॉर्ड में आफताब जहां बेगम के नाम बेहटा में करीब 655 एकड़ और बोरबन क्षेत्र में लगभग 102 एकड़ जमीन दर्ज होने की बात सामने आई है।
शत्रु संपत्ति के दर्जे को लेकर जांच की मांग
मामले में सबसे अहम सवाल शत्रु संपत्ति अधिनियम से जुड़ा है। आरोप है कि पाकिस्तान निवासी होने की जानकारी सामने आने के बावजूद इस तथ्य को छिपाकर जमीन का सौदा किया गया। अब यह जांच किए जाने की मांग है कि संबंधित संपत्तियों पर शत्रु संपत्ति के नियम लागू होने के बावजूद उस समय जमीन की खरीद-बिक्री कैसे हुई।
इसके साथ ही कस्टोडियन विभाग मुंबई की ओर से 2021 में और भोपाल कलेक्टर की ओर से 2022 में नवाब की संपत्तियों को शत्रु संपत्ति के तौर पर दर्ज करने के निर्देशों के बाद पिछले चार वर्षों में हुई कार्रवाई का पूरा ब्योरा भी जांच के दायरे में लाने की मांग की गई है।
सैफ अली खान से मांगे जा रहे पुराने दस्तावेज
जांच की मांग सिर्फ जमीन की खरीद-बिक्री तक सीमित नहीं है। पटौदी परिवार से भोपाल रियासत की संपत्तियों से जुड़े पुराने मूल दस्तावेज उपलब्ध कराने की बात भी सामने आई है। इनमें 29 अप्रैल 1949 को बीपी मेनन द्वारा हस्ताक्षरित नक्शा, 30 अप्रैल 1949 का मर्जर एग्रीमेंट और 1 जून 1949 से पहले तैयार की गई संपत्ति सूची की मूल प्रतियां शामिल हैं।
इन दस्तावेजों को यह समझने के लिए अहम माना जा रहा है कि भोपाल रियासत के भारत में विलय के समय नवाब परिवार के पास कितनी जमीन और कौन-कौन सी संपत्तियां दर्ज थीं।
1395 एकड़ और 1984 एकड़ जमीन का अंतर क्यों?
मामले में एक और बड़ा सवाल पूर्व भोपाल रियासत के 2,556 गांवों में नवाब परिवार की जमीनों को लेकर है। पूर्व प्रमुख सचिव की रिपोर्ट के अनुसार मर्जर एग्रीमेंट में 1,395 एकड़ जमीन दर्ज होने की बात कही गई है। वहीं 9 गांवों में नवाब परिवार के नाम 1,984.13 एकड़ अतिरिक्त जमीन दर्ज होने का दावा किया गया है।ऐसे में जांच की मांग है कि मर्जर एग्रीमेंट में दर्ज जमीन के मुकाबले अतिरिक्त भूमि नवाब परिवार के नाम कैसे दर्ज हुई। इसके साथ ही इन जमीनों की खरीद-बिक्री और उनके रिकॉर्ड में दर्ज होने की पूरी प्रक्रिया की भी पड़ताल की जाए।
अब पुराने रिकॉर्ड खंगालने की मांग
पूरे मामले में जमीन के पुराने राजस्व रिकॉर्ड, मर्जर एग्रीमेंट, संपत्ति सूची और शत्रु संपत्ति से जुड़े सरकारी आदेश अहम माने जा रहे हैं। जांच की मांग करने वालों का कहना है कि दस्तावेजों के आधार पर यह स्पष्ट किया जाना चाहिए कि भोपाल रियासत की संपत्तियों का वास्तविक रिकॉर्ड क्या था और बाद के वर्षों में जमीनों के स्वामित्व में किस तरह बदलाव हुए। फिलहाल मामला पुराने दस्तावेजों और जमीन के रिकॉर्ड की जांच से जुड़े सवालों के कारण चर्चा में है।