मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल अब वॉटर टूरिज्म का नया हॉटस्पॉट बनने जा रही है। शहर के प्रतिष्ठित बड़े तालाब पर पहली बार कश्मीर की डल झील की तर्ज पर आकर्षक शिकारे उतारे गए हैं। इन खूबसूरत शिकारों का लोकार्पण होते ही स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले पर्यटकों में उत्साह बढ़ गया है। प्रीमियम बोटिंग के इस अनुभव को खास बनाने के लिए शिकारे पर्यावरण-अनुकूल तकनीक से तैयार किए गए हैं, जिससे शहर में पर्यटन और रोजगार दोनों को नई गति मिलेगी।
शिकारा सेवा से भोपाल को मिलेगी नई पर्यटन पहचान
भोपाल का बड़ा तालाब हमेशा से शहर की पहचान रहा है, लेकिन शिकारा सेवा शुरू होने के बाद यह स्थान अब राष्ट्रीय स्तर पर वॉटर-टूरिज्म के मानचित्र पर और ज्यादा उभरकर आएगा। तालाब की शांत लहरों पर रंग-बिरंगे शिकारे चलते ही कश्मीर जैसा माहौल दिखने लगा है, जो पर्यटकों को एक अलग स्तर का अनुभव देता है।
20 अत्याधुनिक शिकारे, आधे घंटे की सवारी सिर्फ 400 रुपए
नई सेवा के तहत कुल 20 शिकारे बड़े तालाब में उतारे गए हैं। हर शिकारे में 4 लोग बैठ सकेंगे और आधे घंटे की सवारी का किराया करीब 400 रुपए निर्धारित किया गया है। यह रेट आम लोगों के लिए भी किफायती है और प्रीमियम अनुभव चाहने वालों के लिए भी परफेक्ट विकल्प बनता है।
पर्यावरण-अनुकूल तकनीक—FRP से बने सुरक्षित और टिकाऊ शिकारे
बड़े तालाब के पारिस्थितिकी संतुलन को ध्यान में रखते हुए शिकारे फाइबर रिइनफोर्स्ड पॉलीयूरिथेन (FRP) से तैयार किए गए हैं। यह पूरी तरह नॉन-रिएक्टिव मटीरियल है, जो पानी को प्रदूषित नहीं करता और तालाब की जैव-विविधता को नुकसान नहीं पहुंचने देता। यही वजह है कि इन शिकारों को सुरक्षित, टिकाऊ और आकर्षक माना जा रहा है।
वॉटर टूरिज्म से बढ़ेंगे स्थानीय रोजगार और बिज़नेस अवसर
शिकारा सेवा से न सिर्फ शहर की खूबसूरती बढ़ेगी बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्टार्टअप अवसर भी पैदा होंगे। भोपाल की पहचान अब धार्मिक, ऐतिहासिक और लेक सिटी से आगे बढ़कर वॉटर-टूरिज्म कैपिटल बनने की ओर कदम बढ़ा चुकी है।