भोपाल नगर निगम के स्लॉटर हाउस से जुड़े गौकशी मामले में जांच अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती दिख रही है। SIT की ओर से पूछताछ पूरी होने के बाद असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। रिमांड के दौरान कई अहम जानकारियां सामने आने के बाद राजनीतिक और सामाजिक संगठनों का दबाव भी लगातार बढ़ रहा है।
रिमांड खत्म, कोर्ट से जेल का रास्ता
भोपाल के जिंसी इलाके में स्थित आधुनिक स्लॉटर हाउस से जुड़े इस बहुचर्चित मामले में SIT ने असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा को तीन दिन की रिमांड पर लेकर पूछताछ की थी। रविवार को रिमांड अवधि पूरी होने के बाद उसे कोर्ट में पेश किया गया, जहां से न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। अधिकारियों के अनुसार पूछताछ के दौरान कई अहम तथ्य सामने आए हैं, जिनके आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
महापौर और अधिकारियों की भूमिका पर उठे सवाल
मामले के सामने आने के बाद राजनीतिक दलों और विभिन्न सामाजिक संगठनों ने नगर निगम प्रशासन की भूमिका पर सवाल खड़े किए हैं। स्लॉटर हाउस के संचालन और निगरानी को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग तेज हो गई है। प्रदर्शन कर रहे संगठनों का कहना है कि यदि लापरवाही सामने आती है तो संबंधित अफसरों के खिलाफ भी कानूनी कदम उठाए जाने चाहिए।
SIT कर रही है गहन जांच
विशेष जांच टीम इस पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत पड़ताल कर रही है। स्लॉटर हाउस के संचालन से लेकर मांस की सप्लाई चेन तक सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि नियमों का उल्लंघन कब से हो रहा था और इसमें कौन-कौन शामिल था।
दिसंबर 2025 की बड़ी जब्ती से खुला मामला
इस प्रकरण की जड़ दिसंबर 2025 में सामने आई थी, जब पुलिस मुख्यालय के सामने एक ट्रक से करीब 26 टन मांस जब्त किया गया था। लैब जांच में इसके गोमांस होने की पुष्टि हुई थी। जांच में यह भी सामने आया कि यह खेप जिंसी स्थित उस स्लॉटर हाउस से जुड़ी थी, जिसे पीपीपी मॉडल पर निजी कंपनी को सौंपा गया था।
पीपीपी मॉडल और संचालन पर फोकस
जानकारी के मुताबिक स्लॉटर हाउस को सालाना चार लाख रुपये के किराए पर एक निजी फर्म को दिया गया था, जिसका संचालन असलम कुरैशी उर्फ असलम चमड़ा कर रहा था। अब जांच एजेंसियां यह भी खंगाल रही हैं कि अनुबंध की शर्तों का पालन किया गया या नहीं और नगर निगम स्तर पर निगरानी में कोई चूक तो नहीं हुई।