SUGAR PRICE HIKE---भोपाल में शक्कर की कीमतों में लगातार तेजी देखने को मिल रही है। थोक बाजार में इसके भाव 66 से 67 रुपए किलो तक पहुंच गए हैं, जबकि रिटेल बाजार में उपभोक्ताओं को इससे भी ज्यादा कीमत चुकानी पड़ रही है। बढ़ते दाम ने घर का बजट संभालने वाले उपभोक्ताओं के साथ किराना कारोबारियों की भी चिंता बढ़ा दी है। बाजार विशेषज्ञ विवेक साहू का कहना है कि कीमतों में इस तेजी के पीछे केवल मांग और सप्लाई को जिम्मेदार मानना पर्याप्त नहीं है। सटोरियों की सक्रियता और जमाखोरी की आशंका की भी जांच जरूरी है।
माल उपलब्ध है, फिर भी कीमतें क्यों बढ़ रहीं?
बाजार विशेषज्ञ विवेक साहू के मुताबिक सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब बाजार में शक्कर का स्टॉक मौजूद है और मिलों से सप्लाई भी हो रही है, तो कीमतों में इतनी तेजी क्यों आ रही है। उनका कहना है कि यदि वास्तविक खरीद-बिक्री के बजाय भविष्य में भाव बढ़ने की उम्मीद पर कारोबार होने लगे, तो इसका सीधा असर आम उपभोक्ता पर पड़ता है।
बड़े स्टॉक की जांच की जरूरत
साहू के अनुसार सरकार और संबंधित विभागों को चीनी मिलों, बड़े स्टॉकिस्ट, थोक मंडियों और प्रमुख कारोबारियों के स्टॉक की जांच करनी चाहिए। किस कारोबारी के पास कितना माल है, वह कब खरीदा गया और किस कीमत पर खरीदा गया, इसकी निगरानी से बाजार में असामान्य गतिविधियों का पता लगाया जा सकता है। अगर कहीं जानबूझकर माल रोककर कृत्रिम कमी पैदा करने के प्रमाण मिलते हैं, तो कार्रवाई जरूरी होगी।
सटोरियों की सक्रियता से व्यापारी भी परेशान
शक्कर की कीमतों में लगातार बदलाव का असर ईमानदारी से कारोबार करने वाले व्यापारियों पर भी पड़ रहा है। भाव बढ़ने की स्थिति में व्यापारियों के लिए पुराने स्टॉक का मूल्यांकन, नई खरीद और ग्राहकों को उचित कीमत पर बिक्री करना मुश्किल हो जाता है। विशेषज्ञ का कहना है कि कुछ लोगों की सट्टेबाजी या जमाखोरी के कारण पूरे किराना व्यापार को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है।
सरकार को रखनी होगी बाजार पर नजर
व्यापारियों और बाजार विशेषज्ञों ने सरकार से शक्कर के स्टॉक और कीमतों की नियमित निगरानी की मांग की है। असामान्य खरीदारी, अचानक बढ़े स्टॉक और बाजार में होने वाली बड़ी गतिविधियों पर नजर रखने की जरूरत है। जरूरत पड़ने पर सरकार सप्लाई बढ़ाने और बाजार में अतिरिक्त शक्कर उपलब्ध कराने जैसे कदमों पर भी विचार कर सकती है। इससे कृत्रिम तेजी की आशंका को कम किया जा सकेगा और उपभोक्ताओं को राहत मिल सकती है।