मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में 14 से 17 नवंबर तक 78वां आलमी तब्लीगी इज्तिमा आयोजित होने जा रहा है। इस आयोजन में पाकिस्तान, बांग्लादेश समेत करीब 40 देशों से लाखों मुस्लिम शामिल होंगे। इज्तिमा को लेकर तैयारियां जोरों पर हैं, लेकिन इसी बीच साधु-संतों ने सुरक्षा को लेकर बड़ी मांग उठाई है। उन्होंने कार्यक्रम के हर पंडाल, हर व्यक्ति और हर गतिविधि की रिकॉर्डिंग कराने की अपील की है, ताकि देश की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
भोपाल बनेगा वैश्विक धार्मिक केंद्र
भोपाल में होने वाला आलमी तब्लीगी इज्तिमा दुनियाभर में अपनी खास पहचान रखता है। बताया जाता है कि पूरी दुनिया में यह आयोजन केवल तीन जगहों—पाकिस्तान, बांग्लादेश और भारत के भोपाल में होता है। इस वजह से लाखों की संख्या में देश-विदेश से मुस्लिम समाज के लोग भोपाल पहुंचते हैं। आयोजन की तैयारियों में प्रशासनिक टीमें, आयोजक और स्थानीय स्वयंसेवक पूरी सक्रियता से जुटे हैं।
साधु-संतों ने उठाई निगरानी और रिकॉर्डिंग की मांग
इज्तिमा को लेकर भोपाल में साधु-संतों की बैठक हुई, जिसमें कई प्रमुख धार्मिक नेताओं ने हिस्सा लिया। उनका कहना है कि जब कुंभ जैसे आयोजन में हर पंडाल की गतिविधियों पर प्रशासन की निगरानी रहती है, तो इज्तिमा में भी ऐसा होना चाहिए। उनका मानना है कि देश की सुरक्षा सर्वोच्च है और किसी भी बड़े आयोजन की रिकॉर्डिंग से पारदर्शिता बनी रहती है।
‘देश की सुरक्षा सर्वोपरि’—संतों का तर्क
संतों का कहना है कि यह मांग किसी धार्मिक भेदभाव से नहीं, बल्कि सुरक्षा दृष्टि से की जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर आयोजन में सब कुछ सही है, तो रिकॉर्डिंग से परहेज क्यों? उनका कहना है कि प्रशासन को हर पंडाल, हर सभा स्थल और प्रवेश मार्ग की निगरानी करनी चाहिए। साधु-संतों ने इसे राष्ट्रहित में जरूरी कदम बताया और जल्द ही मुख्यमंत्री से मुलाकात कर यह मांग दोहराने की बात कही है।
प्रशासन की तैयारी और संतों की अपील
इज्तिमा के आयोजन स्थल पर व्यवस्थाओं को लेकर प्रशासन ने भी तैयारियां तेज कर दी हैं। यातायात, पानी, सुरक्षा और मेडिकल सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। वहीं साधु-संतों का कहना है कि इज्तिमा को लेकर सुरक्षा व्यवस्था महाकुंभ जैसी सख्त होनी चाहिए। उन्होंने इसे "धर्म से ऊपर राष्ट्र" की भावना के साथ जोड़ा है।