भोपाल के राजा भोज एयरपोर्ट पर आसमान की सुरक्षा को नई ताकत मिलने जा रही है। यहाँ अत्याधुनिक मोनोपल्स सेकंडरी सर्विलांस रडार (MSSR) सिस्टम लगाया जा रहा है, जो 60 हजार फीट तक उड़ने वाले हर विमान पर पैनी नजर रखेगा। 28 सितंबर को नार्वे से आया यह हाईटेक रडार अब एटीसी के पास बने नए भवन में स्थापित होने की तैयारी में है। दिसंबर तक इसका ट्रायल पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है।
60 हजार फीट तक का कड़ा पहरा
आमतौर पर यात्री विमान 30 से 40 हजार फीट की ऊंचाई पर उड़ते हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय उड़ानें 50 से 60 हजार फीट तक पहुंच जाती हैं। इतनी ऊंचाई पर उड़ते विमानों से एयर ट्रैफिक कंट्रोल (ATC) का सीधा संपर्क कई बार चुनौती बन जाता है। नए MSSR सिस्टम की खासियत है कि यह इतनी ऊंचाई पर भी विमान की लोकेशन और दिशा तुरंत पकड़ सकता है और पलभर में उसका डेटा कंट्रोल रूम तक भेज देता है।
दुश्मन का भी पता चलेगा
रहस्यमय बात यह है कि यह रडार केवल यात्री विमानों को ही नहीं, बल्कि किसी संदिग्ध या दुश्मन देश के विमान को भी स्कैन कर सकेगा। जैसे ही कोई अनजान विमान भोपाल एयरस्पेस में दाखिल होगा, यह सिस्टम उसकी पहचान, ऊंचाई और दिशा का अलर्ट जारी कर देगा। इससे आपात स्थिति में विमान चालक दल को त्वरित दिशा-निर्देश देना और डेटा नागपुर तथा दिल्ली मुख्यालय तक भेजना बेहद आसान होगा।
दिसंबर में ट्रायल, नववर्ष से सक्रियता
एयरपोर्ट परिसर में रडार के लिए नया भवन तैयार कर लिया गया है। दिसंबर तक इसके ट्रायल पूरे करने के बाद नए साल में यह पूरी तरह सक्रिय हो जाएगा। इसके काम करना शुरू करते ही भोपाल के आकाश में उड़ान भरने वाला कोई भी विमान इस तकनीक की तेज नजर से बच नहीं सकेगा।