धार स्थित भोजशाला विवाद पर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए इसे वाग्देवी मंदिर के रूप में मान्यता दी है। अदालत ने ASI के 2003 के आदेशों को निरस्त करते हुए हिंदू पक्ष को पूजा का अधिकार और मुस्लिम पक्ष को नमाज की अनुमति देने वाले निर्देशों को भी खारिज कर दिया है। फैसले के बाद प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को कड़ा कर दिया है और क्षेत्र में सतर्कता बढ़ा दी गई है।
हाईकोर्ट का फैसला: भोजशाला को वाग्देवी मंदिर की मान्यता
हाईकोर्ट ने सुनवाई में स्पष्ट किया कि ऐतिहासिक और संरक्षित स्थल भोजशाला देवी सरस्वती का मंदिर है। अदालत ने कहा कि परिसर का प्रबंधन केंद्र सरकार और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के तहत रहेगा। साथ ही यह भी निर्देश दिया गया कि 1958 एक्ट के अनुसार इसकी देखरेख और संचालन की व्यवस्था तय की जाए। इस फैसले को मामले में निर्णायक मोड़ माना जा रहा है।
ASI के आदेशों पर रोक और कानूनी स्थिति
अदालत ने ASI द्वारा वर्ष 2003 में जारी उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें हिंदुओं को पूजा की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके साथ ही मुस्लिम पक्ष को नमाज पढ़ने की अनुमति देने वाले निर्देश भी खारिज कर दिए गए। अदालत ने स्पष्ट किया कि प्रबंधन ASI के हाथ में रहेगा, लेकिन धार्मिक उपयोग को लेकर नए दिशा-निर्देश सरकार और ASI तय करेंगे।
मुस्लिम पक्ष का दावा और वैकल्पिक मांग
मुस्लिम पक्ष का कहना है कि भोजशाला ऐतिहासिक रूप से कमाल मौला मस्जिद के रूप में उपयोग में रही है। उनका तर्क है कि धार्मिक स्वरूप तय करने का अधिकार सिविल कोर्ट को होना चाहिए। पक्ष ने ASI सर्वे की पारदर्शिता पर सवाल उठाते हुए कहा कि उपलब्ध साक्ष्य स्पष्ट नहीं हैं। साथ ही सरकार से अलग भूमि पर मस्जिद के लिए व्यवस्था करने की मांग भी रखी गई है।
हिंदू और जैन पक्ष के अलग-अलग दावे
हिंदू पक्ष ने भोजशाला को मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर बताते हुए ऐतिहासिक ग्रंथों, शिलालेखों और संरचना को आधार बनाया। वहीं जैन समाज ने दावा किया कि यहां मिली प्रतिमा मां वाग्देवी की नहीं बल्कि मां अंबिका की है और इसे जैन तीर्थ घोषित किया जाना चाहिए। इस तरह स्थल को लेकर तीन अलग-अलग धार्मिक दावे सामने आए हैं।
सुरक्षा व्यवस्था सख्त, पुलिस बल तैनात
फैसले के बाद धार में सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत कर दिया गया है। लगभग 1200 पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया है और पूरे शहर को 12 सुरक्षा लेयर में बांटा गया है। रैपिड एक्शन फोर्स और रिजर्व पुलिस बल को भी अलर्ट पर रखा गया है ताकि किसी भी स्थिति में कानून-व्यवस्था प्रभावित न हो।