‘‘गेंद से प्यार करना पड़ता है’’ यह सीधा मंत्र प्रवीण कुमार ने दिया और इसी ने भुवनेश्वर कुमार की पूरी पहचान बदल दी। मेरठ से शुरू हुई यह कहानी सिर्फ गेंदबाजी नहीं बल्कि जुनून की मिसाल बन गई। करीब दो दशकों में भुवनेश्वर ने गेंद को समझा, संभाला और उसी से रिश्ता बनाकर खुद को अलग मुकाम पर पहुंचाया।
स्विंग का बना सबसे बड़ा हथियार
तेज और ताकतवर गेंदबाजों के बीच भुवनेश्वर ने अपनी जगह स्विंग के दम पर बनाई। पावरप्ले में उनकी सटीक लाइन लेंथ और गेंद को दोनों तरफ मूव कराने की कला उन्हें खास बनाती है। यही कारण है कि आज वह आईपीएल के सबसे भरोसेमंद गेंदबाजों में गिने जाते हैं। बल्लेबाज जहां टी20 में हावी रहते हैं, वहीं भुवनेश्वर अपनी गेंद से उन्हें नियंत्रित करते नजर आते हैं।
गेंद से रिश्ता ही ताकत बना
प्रवीण कुमार बताते हैं कि भुवनेश्वर गेंद को किसी खजाने की तरह संभालते हैं। वह उसे चमकाते हैं, धूल हटाते हैं और हर गेंद पर ध्यान देते हैं। यही कारण है कि गेंद भी उनके मुताबिक व्यवहार करती है। हाल ही में दिल्ली में खेले गए मैच में यह साफ दिखा, जब कम मूवमेंट के बावजूद गेंदबाज ने बल्लेबाजों को पूरी तरह काबू में रखा।
आंकड़े बताते हैं दबदबा
भुवनेश्वर कुमार आईपीएल इतिहास के सबसे सफल तेज गेंदबाजों में शामिल हैं। उनके नाम 212 विकेट हैं और उनका इकॉनमी रेट भी बेहद किफायती है। पावरप्ले में सबसे ज्यादा 88 विकेट लेने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है। इन आंकड़ों से साफ है कि वह सिर्फ अनुभव नहीं बल्कि लगातार प्रदर्शन के दम पर शीर्ष पर पहुंचे हैं।
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खुद से सीखने की कला
भुवनेश्वर ने अपनी गेंदबाजी खुद समझकर बेहतर की। उन्होंने रन अप, ग्रिप और रिलीज के छोटे बदलावों पर ध्यान दिया और खुद ही अपने कोच बन गए। इसी प्रक्रिया ने उन्हें इनस्विंग और आउटस्विंग दोनों में महारत दिलाई। महान गेंदबाजों से सीखते हुए भी उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।
मेहनत से बनी अलग पहचान
प्रवीण कुमार के अनुसार, भुवनेश्वर का समर्पण ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। उन्होंने दूसरों की नकल करने के बजाय अपनी तकनीक विकसित की। यही कारण है कि आज वह हर फॉर्मेट में सफल हैं। यह कहानी बताती है कि अगर जुनून और मेहनत हो तो साधारण शुरुआत भी असाधारण सफलता में बदल सकती है।