सरकार GST को और सरल और जनहितकारी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। 12% टैक्स स्लैब को खत्म कर उसमें आने वाले दर्जनों प्रोडक्ट्स को 5% स्लैब में लाया जा सकता है। इससे आम जनता को बड़ी राहत मिलेगी और रोजमर्रा के कई सामान सस्ते हो सकते हैं। आपको बता दें कि 8 साल पहले लागू हुआ गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) अब एक और बड़े रिफॉर्म की ओर बढ़ रहा है।
कुछ चीजों के रेट पर होगा असर
केंद्र सरकार की योजना है कि 12% टैक्स स्लैब को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए और इसमें आने वाले अधिकांश उत्पादों को सीधे 5% टैक्स ब्रैकेट में शिफ्ट किया जाए। सूत्रों के मुताबिक, इस प्रस्ताव पर चर्चा जुलाई के तीसरे सप्ताह या मानसून सत्र के बाद होने वाली GST काउंसिल की बैठक में होगी। इस कदम का असर जूते-चप्पल, मिठाइयों, डेयरी प्रोडक्ट्स, सामान्य कपड़े, घरेलू सजावटी सामान, बांस-लकड़ी का फर्नीचर और फूड प्रोसेसिंग प्रोडक्ट्स पर पड़ेगा। ये चीजें सस्ती हो सकती हैं।
सेस भी होगा जीएसटी में शामिल
सरकार सिर्फ 12% स्लैब हटाने की नहीं, बल्कि महंगे सामानों पर लगने वाले सेस टैक्स को भी सीधे GST रेट में शामिल करने की तैयारी कर रही है। अभी कार, सिगरेट, पान मसाला, कोल्ड ड्रिंक जैसी वस्तुओं पर 28% GST के साथ 22% तक सेस लगता है। भविष्य में यह सीधा 50% GST के तौर पर दिखेगा। इससे टैक्स व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी होगी और राज्यों को अधिक राजस्व मिलेगा।
12% टैक्स स्लैब में आने वाले प्रमुख सामान
यहां उन प्रमुख वस्तुओं की सूची है जिन पर अभी 12% टैक्स लगता है और जो भविष्य में 5% में आ सकती हैं:
-डेयरी प्रोडक्ट्स: पनीर, मक्खन, कंडेन्स्ड मिल्क
-मिठाई और नमकीन: भुजिया, चबेना, मिठाइयां
-1000 रुपये तक के जूते और सामान्य कपड़े
-पास्ता, मैकरोनी, स्पेगेटी
-फर्नीचर (बांस, लकड़ी)
-लकड़ी-पत्थर की मूर्तियां और सजावटी सामान
-क्लीन एनर्जी डिवाइसेज
-टेबलवेयर, रसोई और जिम उपकरण
-चश्मा और सुधारात्मक लेंस
-20 लीटर वाली पैक्ड पेयजल की बोतलें
-अगर इन्हें 5% स्लैब में डाला गया, तो उपभोक्ताओं के लिए ये चीजें सस्ती हो जाएंगी।
राज्यों की सहमति जरूरी
हालांकि सरकार इस बदलाव को अंतिम रूप देने से पहले सभी राज्यों की सहमति चाहती है। कुछ राज्यों को आशंका है कि टैक्स घटने से उनकी कमाई प्रभावित हो सकती है। लेकिन सरकार का कहना है कि सेस को GST में शामिल कर राज्यों को राजस्व का बड़ा हिस्सा मिलेगा।
जरूरी दवाएं और आम जनता को फायदा
फिलहाल जरूरी दवाएं 5% स्लैब या टैक्स फ्री हैं, बाकी दवाएं 12% स्लैब में आती हैं। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सभी दवाओं को 5% में लाना जरूरी है ताकि इलाज सस्ता हो सके। विशेषज्ञों का मानना है कि टैक्स स्लैब को तीन स्तरों (5%, 18%, 28%) तक सीमित करना करदाताओं और ग्राहकों—दोनों के लिए फायदेमंद होगा।
क्या कहती है सरकार?
सरकार और GST काउंसिल का फोकस इस बार टैक्स सिस्टम को सरल बनाने, राजस्व संतुलन बनाए रखने और उपभोक्ताओं को राहत देने पर होगा। फाइनेंस कमीशन अक्टूबर 2025 में टैक्स शेयरिंग का नया फार्मूला तय करेगा जो FY27 से लागू होगा। ऐसे में सरकार चाहती है कि GST से जुड़े बड़े फैसले उससे पहले लिए जाएं।