Custodial Death Case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2014 के चर्चित कस्टोडियल डेथ मामले में अहम फैसला सुनाते हुए आठ पुलिसकर्मियों पर हत्या के आरोप को बरकरार रखा है। अदालत ने कहा कि एग्नेलो वाल्डारिस की हिरासत में हुई मौत के मामले में पहली नजर में टॉर्चर के संकेत मिलते हैं, इसलिए इस केस में ट्रायल चलना जरूरी है। यह फैसला न्याय प्रक्रिया में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
स्पेशल कोर्ट के फैसले को दी गई मंजूरी
हाईकोर्ट ने सितंबर 2022 में स्पेशल ट्रायल कोर्ट द्वारा दिए गए आदेश को सही ठहराया, जिसमें पुलिसकर्मियों के खिलाफ हत्या का केस चलाने की अनुमति दी गई थी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपों को खारिज नहीं किया जा सकता और मामले की पूरी सुनवाई जरूरी है।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मिले टॉर्चर के संकेत
अदालत की डिवीजन बेंच, जिसमें अजय गडकरी और श्याम चंदक शामिल थे, ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मृतक के शरीर पर कई चोटों के निशान मिले हैं। इससे यह संकेत मिलता है कि उसे हिरासत में प्रताड़ित किया गया हो सकता है। कोर्ट ने यह भी माना कि ऐसे मामलों में प्रत्यक्ष गवाह कम होते हैं, इसलिए परिस्थितिजन्य साक्ष्य अहम भूमिका निभाते हैं।
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2014 में हिरासत के दौरान हुई थी मौत
यह मामला अप्रैल 2014 का है, जब 25 वर्षीय एग्नेलो वाल्डारिस की वडाला रेलवे पुलिस स्टेशन में हिरासत के दौरान मौत हो गई थी। उसे चेन स्नैचिंग के शक में तीन अन्य लोगों के साथ हिरासत में लिया गया था। पुलिस ने शुरू में आरोपों से इनकार किया था, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट ने कई सवाल खड़े कर दिए।
परिवार ने लगाए गंभीर आरोप
मृतक के परिवार, खासकर पिता लियोनार्ड वाल्डारिस, ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि एग्नेलो को बुरी तरह पीटा गया, उसके साथ अमानवीय व्यवहार किया गया और यही उसकी मौत का कारण बना। गवाहों के मुताबिक, उसे बेल्ट और डंडों से मारा गया और शारीरिक व मानसिक प्रताड़ना दी गई। अब कोर्ट के इस फैसले के बाद मामले में आगे की सुनवाई और जांच पर सबकी नजर बनी हुई है।