बिहार की राजनीति में उस वक्त हलचल तेज हो गई, जब पटना हाईकोर्ट ने पक्ष और विपक्ष के कुल 42 विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया। इन पर चुनाव के दौरान वोटों में अनियमितता और हलफनामे में गलत जानकारी देने के आरोप लगाए गए हैं। अदालत ने प्रारंभिक सुनवाई के बाद सभी संबंधित जनप्रतिनिधियों को निर्धारित समय में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
चुनाव याचिकाओं पर हुई सुनवाई
मामला उन विधानसभा क्षेत्रों से जुड़ा है जहां चुनाव हारने वाले उम्मीदवारों ने विजयी विधायकों के खिलाफ याचिकाएं दायर की थीं। आरोप है कि मतगणना में गड़बड़ी, वोटों की अनियमितता और शपथ पत्र में तथ्यों को छिपाने जैसे मुद्दे सामने आए। गुरुवार को हुई प्रारंभिक सुनवाई में हाईकोर्ट ने याचिकाओं को गंभीर मानते हुए सभी 42 विधायकों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
किन-किन नेताओं को मिला नोटिस?
नोटिस पाने वालों में सत्तारूढ़ गठबंधन और विपक्ष—दोनों खेमों के नेता शामिल हैं। इनमें बिजेंद्र यादव, जिवेश मिश्रा और चेतन आनंद जैसे नाम भी शामिल बताए जा रहे हैं। इसके अलावा अन्य दलों के विधायक भी इस दायरे में आए हैं। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जवाब और साक्ष्यों के आधार पर आगे की सुनवाई की दिशा तय की जाएगी।
2025 चुनाव परिणाम के बाद बढ़ा विवाद
14 नवंबर 2025 को बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे घोषित हुए थे। चुनाव में एनडीए गठबंधन को बहुमत मिला था। भारतीय जनता पार्टी और जनता दल (यूनाइटेड) को सबसे अधिक सीटें मिली थीं, जबकि राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस अपेक्षाकृत कम सीटों पर सिमट गई थीं। परिणाम आने के बाद कई पराजित उम्मीदवारों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
आगे क्या होगी कानूनी प्रक्रिया?
हाईकोर्ट ने संबंधित विधायकों को तय समय में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अगली सुनवाई में अदालत आरोपों, दस्तावेजों और प्रस्तुत साक्ष्यों की समीक्षा करेगी। यदि आरोप प्रथमदृष्टया सही पाए जाते हैं तो मामला और गंभीर कानूनी मोड़ ले सकता है। फिलहाल नोटिस जारी होने भर से प्रदेश की सियासत में बयानबाजी और रणनीतिक हलचल तेज हो गई है।
सियासी असर और संभावित प्रभाव
42 विधायकों को एक साथ नोटिस मिलना अपने आप में असाधारण घटना मानी जा रही है। इससे सरकार और विपक्ष दोनों पर दबाव बढ़ सकता है। राजनीतिक दल इस मुद्दे को अपने-अपने तरीके से भुनाने की कोशिश कर सकते हैं। अब सबकी नजर पटना हाईकोर्ट की अगली सुनवाई पर टिकी है, जो बिहार की राजनीति में नए समीकरण तय कर सकती है।