बिहार सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 3,47,589.76 करोड़ रुपये का बजट पेश किया है, जो राज्य के इतिहास का सबसे बड़ा बजट माना जा रहा है। यह पिछले साल के 3.17 लाख करोड़ रुपये के बजट से काफी ज्यादा है। सरकार का दावा है कि यह बजट “विकसित बिहार” की नींव रखेगा। आम भाषा में कहें तो सरकार ने खर्च बढ़ाकर विकास की रफ्तार तेज करने की कोशिश की है, लेकिन सवाल यही है कि इतना बड़ा बजट जमीन पर कितना असर दिखाएगा।
सात निश्चय-3 और विकास का दावा
वित्त मंत्री ने कहा कि यह बजट “सात निश्चय-3” के विजन पर आधारित है। सरकार का अनुमान है कि आने वाले साल में बिहार की विकास दर 14.9 प्रतिशत तक पहुंच सकती है। सुनने में यह आंकड़ा अच्छा लगता है, लेकिन अगर योजनाएं समय पर पूरी नहीं हुईं तो इसका नुकसान जनता को ही होगा। सरकार का फोकस यह दिखाने का है कि बिहार भी अब तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
महिलाओं के लिए क्या बदलेगा?
बजट में महिलाओं को खास तवज्जो दी गई है। सरकार के मुताबिक अब तक 1.56 करोड़ महिलाओं को अलग-अलग योजनाओं का फायदा मिल चुका है। इसमें ₹10,000 तक की आर्थिक मदद और स्वरोजगार से जुड़ी योजनाएं शामिल हैं। आगे भी महिला उद्यमिता और सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने की बात कही गई है। हालांकि अगर योजनाओं में देरी या भ्रष्टाचार हुआ, तो असली फायदा महिलाओं तक पहुंचने से पहले ही अटक सकता है।
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युवाओं को नौकरी मिलेगी या सिर्फ वादा?
युवाओं के लिए रोजगार इस बजट का बड़ा मुद्दा है। सरकार का कहना है कि उद्योगों में बड़े निजी निवेश लाए जाएंगे और इससे लाखों नौकरियां पैदा होंगी। करीब 50 लाख करोड़ रुपये के निजी निवेश की संभावनाओं की बात कही गई है। लेकिन अगर निवेश जमीन पर नहीं उतरा, तो बेरोजगारी की समस्या जस की तस रह सकती है। युवाओं को उम्मीद तो मिली है, पर भरोसा काम मिलने पर ही बनेगा।
किसानों के लिए चौथा कृषि रोडमैप
किसानों के लिए चौथे कृषि रोडमैप को जारी रखने की घोषणा हुई है। इसमें सिंचाई, भंडारण, उत्पादन और बाजार तक पहुंच बेहतर करने की बात कही गई है। ग्रामीण हाट और स्थानीय बाजारों को मजबूत करने का भी प्लान है। अगर ये योजनाएं सही से लागू हुईं तो किसानों की आमदनी बढ़ सकती है, लेकिन अगर कागजों में ही सीमित रहीं तो नुकसान फिर किसानों को ही झेलना पड़ेगा।
गरीब और इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस
बजट में 94 लाख गरीब परिवारों को सशक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। शिक्षा, स्वास्थ्य और आवास पर खर्च बढ़ाने की बात कही गई है। साथ ही पांच नए एक्सप्रेसवे, सड़कों और कनेक्टिविटी पर भी जोर है। इंफ्रास्ट्रक्चर मजबूत हुआ तो विकास तेज होगा, लेकिन देरी और लागत बढ़ी तो इसका बोझ आखिरकार जनता पर ही आएगा।