बिहार में एनडीए सरकार के गठन के बाद डिप्टी सीएम और गृह मंत्री सम्राट चौधरी पूरी तरह से एक्शन मोड में नज़र आ रहे हैं। नालंदा, पटना, आरा, सीतामढ़ी और खगड़िया समेत कई जिलों में अवैध अतिक्रमण के खिलाफ बड़े पैमाने पर बुलडोजर अभियान चलाया जा रहा है। जैसे ही पीला पंजा चला, पूरे प्रदेश में हलचल मच गई और विपक्ष भी हमलावर हो गया। प्रशासन को साफ निर्देश हैं कि सरकारी जमीन, सड़क, और सार्वजनिक स्थलों पर कब्जा करने वालों को किसी भी कीमत पर राहत नहीं मिलेगी। कार्रवाई की तस्वीरें सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहीं हैं, जिससे यह अभियान पूरे राज्य की सबसे बड़ी चर्चा बन गया है।
गरीबों पर हो रही कार्रवाई- तेज प्रताप
अवैध कब्जों पर हो रही कार्रवाई को लेकर विपक्ष ने सरकार पर हमला बोला है। तेज प्रताप यादव ने आरोप लगाया कि ज्यादातर ढांचे गरीब और वंचित परिवारों के हैं, जिनकी सर्दी में मुश्किलें बढ़ गई हैं। उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय का नाम लेने वाली सरकार गरीबों की पुकार को अनसुना कर रही है। हालांकि सरकार का दावा है कि जिन ढांचों पर कार्रवाई हुई है, वे अवैध कब्जे हैं और कानून सबके लिए बराबर है। सरकार ने विपक्ष के आरोपों को राजनीति बताते हुए कहा कि अब बिहार में ‘जीरो टॉलरेंस नीति’ लागू होगी और किसी भी तरह का कब्जा बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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सम्राट चौधरी ने दिया बड़ा संदेश
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने कहा है कि सरकार अवैध कब्जों के साथ-साथ अपराध पर भी सख्त कार्रवाई करेगी। उन्होंने बताया कि 400 कुख्यात अपराधियों की सूची तैयार है और जल्द ही बड़े स्तर पर कार्रवाई की जाएगी। सम्राट चौधरी का कहना है कि बिहार में अब कानून सर्वोपरि होगा और शासन व्यवस्था को मजबूत बनाना सरकार की प्राथमिकता है। इसी के चलते बुलडोजर और पुलिस दोनों मोर्चों पर सक्रिय हैं। सरकार का दावा है कि इस अभियान से राज्य को अपराध और अतिक्रमण मुक्त बनाने में मदद मिलेगी।
बिहार की राजनीति में बढ़ी हलचल
बिहार में चल रहे बुलडोजर अभियान ने राजनीतिक हलचलों को और तेज कर दिया है। लोग इसे यूपी के ‘योगी मॉडल’ से जोड़कर देख रहे हैं, जहां वर्षों से बुलडोजर कार्रवाई अपराधियों और कब्जाधारियों के खिलाफ सरकार की मजबूती का प्रतीक रहा है। बिहार में भी इसी प्रकार का मॉडल दिखाई देने लगा है, जिससे विरोधियों में बेचैनी बढ़ गई है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह अभियान इसी रफ्तार से चलता रहा, तो राज्य की छवि के साथ-साथ राजनीतिक समीकरणों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। फिलहाल नालंदा से पटना तक चल रही कार्रवाई ने पूरे राज्य में एक नया माहौल बना दिया है और इस पर दिल्ली तक चर्चा गर्म है।