नीतीश कुमार के दिल्ली पहुंचने के साथ ही बिहार की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। बताया जा रहा है कि वह 10 अप्रैल को राज्यसभा की शपथ लेंगे, जिससे सत्ता परिवर्तन की अटकलें और मजबूत हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, 14 अप्रैल को वह मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं। इस बीच राज्य में नई सरकार के गठन को लेकर चर्चाएं तेज हैं और सबसे बड़ा सवाल यही है कि अगला मुख्यमंत्री कौन होगा।
बीजेपी के 8 नेताओं के नाम चर्चा में
सूत्रों के मुताबिक भारतीय जनता पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद के लिए कई नामों पर विचार चल रहा है। इनमें सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, नित्यानंद राय, दिलीप जायसवाल, संजीव चौरसिया, रमा निषाद और जनक राम जैसे नाम प्रमुख हैं। इन नामों को लेकर पार्टी के भीतर मंथन जारी है। माना जा रहा है कि इस बार भाजपा अपने दम पर मुख्यमंत्री बनाने की रणनीति पर काम कर रही है।
सम्राट चौधरी सबसे आगे माने जा रहे
डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। वह फिलहाल राज्य के गृहमंत्री भी हैं और पार्टी संगठन में मजबूत पकड़ रखते हैं। 2018 में भाजपा में शामिल होने के बाद उन्होंने तेजी से अपनी पहचान बनाई और प्रदेश अध्यक्ष जैसे अहम पद तक पहुंचे। ओबीसी वर्ग से आने वाले सम्राट चौधरी को सामाजिक समीकरण के लिहाज से भी मजबूत दावेदार माना जा रहा है। पटना में उनके समर्थन में पोस्टर लगना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि उनके पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश हो रही है।
अन्य दावेदार भी मजबूत
इसके अलावा विजय कुमार सिन्हा का नाम भी मुख्यमंत्री की रेस में आगे है। वह भूमिहार समुदाय के बड़े नेता माने जाते हैं और प्रशासनिक अनुभव भी रखते हैं। वहीं नित्यानंद राय केंद्र में मंत्री हैं और संगठन में उनकी पकड़ मजबूत है। संजीव चौरसिया अति पिछड़ा वर्ग से आते हैं, जबकि जनक राम दलित चेहरे के रूप में जाने जाते हैं। इन सभी नामों के जरिए भाजपा अलग-अलग सामाजिक वर्गों को साधने की कोशिश कर रही है।
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सियासी समीकरण पर टिकी नजर
बिहार की राजनीति में जातीय संतुलन हमेशा अहम भूमिका निभाता है। ऐसे में मुख्यमंत्री के चयन में सामाजिक समीकरण सबसे बड़ा फैक्टर होगा। भाजपा के सामने चुनौती यह है कि वह ऐसा चेहरा चुने जो सभी वर्गों को साथ लेकर चल सके और चुनावी रणनीति को मजबूत बनाए।
14 अप्रैल के बाद साफ होगी तस्वीर
अगर नीतीश कुमार इस्तीफा देते हैं, तो बिहार में सत्ता परिवर्तन तय माना जा रहा है। इसके बाद भाजपा के नेतृत्व में नई सरकार बन सकती है। हालांकि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व के हाथ में है। अब सबकी नजर 14 अप्रैल के बाद होने वाले राजनीतिक घटनाक्रम पर टिकी है, जो बिहार की सियासत की दिशा तय करेगा।