बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की सरगर्मी अब मध्य प्रदेश तक महसूस की जा रही है। यहां के बड़े ओबीसी चेहरे बिहार के चुनावी मैदान में अहम भूमिका निभाने वाले हैं। बीजेपी और कांग्रेस दोनों ही अपने भरोसेमंद नेताओं को बिहार भेजने की तैयारी कर रही हैं। जहां भाजपा सीएम मोहन यादव और शिवराज सिंह चौहान जैसे नेताओं को स्टार प्रचारक बना रही है, वहीं कांग्रेस अरुण यादव, सचिन यादव और पटेल नेताओं पर दांव खेल रही है।
भाजपा का यादव कार्ड: मोहन और शिवराज पर दांव
भाजपा बिहार में यादव वोट बैंक को साधने के लिए एमपी के सीएम मोहन यादव को बड़ा चेहरा बनाने जा रही है। मोहन यादव को यूपी-बिहार की राजनीति में यादव वंश के प्रभाव को चुनौती देने का जिम्मा सौंपा गया है। वहीं, शिवराज सिंह चौहान की किसान हितैषी छवि और गरीबों से जुड़ाव बिहार में भाजपा को मजबूत कर सकते हैं।
कांग्रेस का यादव-पटेल समीकरण
कांग्रेस भी ओबीसी वोट बैंक को टारगेट करने की तैयारी में है। एमपी कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरुण यादव और उनके भाई सचिन यादव को अहम जिम्मेदारी दी जा रही है। इनके साथ कमलेश्वर पटेल, सत्यनारायण पटेल और दिनेश गुर्जर भी बिहार के मैदान में उतरेंगे। कांग्रेस इन नेताओं को राहुल गांधी की वोट अधिकार यात्रा से भी जोड़ सकती है।
एमपी का बढ़ता राजनीतिक असर
बिहार चुनाव में मध्य प्रदेश के नेताओं की एंट्री साफ संकेत देती है कि राष्ट्रीय राजनीति में एमपी का ओबीसी नेतृत्व अब बड़ी भूमिका निभा रहा है। आने वाले समय में यह बिहार के चुनावी परिणामों पर भी असर डाल सकता है।