बिहार विधानसभा चुनाव के रुझानों ने साफ कर दिया है कि इस बार मुकाबला एकतरफा हो चुका है और एनडीए ऐतिहासिक जीत की ओर बढ़ रहा है। 243 सीटों वाली विधानसभा में एनडीए 200 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए है, जबकि महागठबंधन 40 के आसपास सिमटता नजर आ रहा है। इस प्रचंड बढ़त के पीछे सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी हैं बिहार की महिला वोटर, जिन्होंने इस बार रिकॉर्ड मतदान किया और राज्य की राजनीति की दिशा बदल दी। चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि जहां पुरुषों का मतदान प्रतिशत 62.98 रहा, वहीं महिलाओं ने 71.78% की भागीदारी के साथ इतिहास रच दिया। बूथों पर जुटी लंबी कतारों ने पहले ही संकेत दे दिया था कि महिलाएं इस चुनाव में निर्णायक भूमिका निभाने जा रही हैं।
महिलाओं में एनडीए के पक्ष में मजबूत भरोसा
महिला वोटरों की इस भागीदारी का सीधा असर रुझानों में दिखाई दे रहा है। तेजस्वी यादव की ‘माई बहिन मान योजना’ और महिलाओं को सालाना 30,000 रुपये देने का वादा भी उन्हें उतना आकर्षित नहीं कर पाया। इसके मुकाबले नीतीश सरकार की पहले से लागू योजनाएं जैसे जीविका समूह मॉडल, साइकिल-पोशाक योजना, पंचायतों व नगर निकायों में 50% आरक्षण पहले ही महिलाओं के बीच गहरी पकड़ बनाए हुए थीं। खासकर पहला बड़ा प्रभाव तब दिखा जब चुनाव से ठीक पहले सरकार ने प्रत्येक महिला के खाते में 10,000 रुपये की सीधी आर्थिक सहायता भेजी। इस एक कदम ने दो करोड़ से अधिक वोटरों के बीच माहौल बदल दिया और महिलाओं में एनडीए के पक्ष में मजबूत भरोसा तैयार किया।
महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया
इसके साथ ही ‘लखपति दीदी’ योजना भी चुनाव में गेमचेंजर साबित हुई। इस कार्यक्रम ने ग्रामीण महिलाओं को स्व-रोजगार, प्रशिक्षण, लोन और बाजार से जुड़ाव जैसे अवसर देकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाया। जीविका समूह मॉडल ने लाखों महिलाओं को संगठित किया, जिससे सरकार के प्रति एक स्थायी विश्वास कायम हुआ। सुपौल, मधुबनी और किशनगंज जैसे जिलों में महिला वोटरों की भारी मौजूदगी ने यह साबित कर दिया कि अब बिहार की राजनीति में महिलाएं सिर्फ भागीदारी नहीं बल्कि पूरी चुनावी दिशा तय कर रही हैं।
नीतीश कुमार के हाथों में बिहार की कमान
रुझानों में साफ दिख रहा है कि महिलाओं ने इस बार महागठबंधन पर कम, और नीतीश कुमार के 20 साल के कामों पर ज्यादा भरोसा जताया। पंचायत आरक्षण, नौकरी में 35% कोटा, बेटियों के लिए शिक्षा और सुरक्षा योजनाओं ने महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से मजबूत बनाया है। यही वजह है कि महिलाएं एकजुट होकर एनडीए के पक्ष में खड़ी हुईं और चुनाव का पूरा समीकरण बदल गया। 2025 के रुझान यह स्पष्ट बताते हैं कि सशक्त महिलाएं अब सशक्त नेतृत्व को चुन रही हैं, और इस बार उन्होंने बिहार की कमान एक बार फिर से नीतीश कुमार के हाथों में सौंप दी है।