बिहार की सियासत में एक बार फिर से जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। आगामी विधानसभा चुनावों की आहट के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने प्रचार अभियान की कमान अपने हाथों में ले ली है। अब तक तीन बड़े क्षेत्रों में विशाल जनसभाएं कर चुके पीएम मोदी की रणनीति साफ नजर आ रही है—हर प्रमंडल तक सीधी पहुंच और मतदाताओं से सीधा संवाद।
अब तक तीन जगहों पर सभाएं, अगले चरण में और रैलियों की तैयारी
प्रधानमंत्री ने हाल ही में राज्य के तीन अहम प्रमंडलों—मधुबनी, बिक्रमगंज और सिवान—में रैलियां कर सियासी शंखनाद कर दिया है। इन सभाओं में भारी जनसैलाब उमड़ा और कई चुनावी संकेत साफ तौर पर देखने को मिले। वहीं, अब चुनाव प्रचार के अगले चरण में प्रधानमंत्री की छह और रैलियां प्रस्तावित हैं। इन रैलियों को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं और राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ गई है।
कोसी, गया और बेगूसराय में भी होगी सीधी चुनावी टक्कर
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री की अगली सभाएं कोसी क्षेत्र, गया और बेगूसराय में आयोजित की जाएंगी। इन इलाकों में जातीय और क्षेत्रीय समीकरण अहम माने जाते हैं, ऐसे में प्रधानमंत्री की मौजूदगी इन क्षेत्रों में चुनावी माहौल को काफी प्रभावित कर सकती है। बची हुई तीन और रैलियों की जगहों को लेकर अंतिम निर्णय जल्द लिया जाएगा।
15 जुलाई से शुरू होगा मैराथन प्रचार अभियान, 15 सितंबर तक चलेगा अभियान
भाजपा की ओर से राज्य में एक बड़े और सुनियोजित प्रचार अभियान की योजना तैयार कर ली गई है। 15 जुलाई से 15 सितंबर तक हर विधानसभा क्षेत्र में अभियान चलाया जाएगा। पार्टी की रणनीति चुनाव की औपचारिक घोषणा से पहले ही हर मतदाता तक पहुंचने की है। इसके लिए बूथ स्तर से लेकर जिला स्तर तक कार्यकर्ताओं की ड्यूटी तय कर दी गई है।
विधानसभा चुनाव अक्टूबर-नवंबर में होने की संभावना, हर सीट पर टिकी नजर
हालांकि अभी तक चुनाव आयोग की ओर से विधानसभा चुनाव की तारीखों का औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन राजनीतिक हलचल और पार्टी स्तर पर तेज गतिविधियों को देखकर यह साफ है कि अक्टूबर-नवंबर के बीचबिहार का चुनावी रण पूरी गर्मी पर होगा। ऐसे में सत्तारूढ़ गठबंधन की ओर से प्रचार की बागडोर खुद प्रधानमंत्री द्वारा संभालना यह दर्शाता है कि इस बार मुकाबला बेहद दिलचस्प और कड़ा होगा।