
बिहार विधानसभा चुनावों को लेकर भारतीय जनता पार्टी ने पूरी तैयारी शुरू कर दी है. वहीं मेनिफेस्टो कमेटी के गठन के बाद अब पार्टी ने प्रदेश चुनाव समिति का ऐलान कर दिया है. इस समिति में 15 नेताओं को जगह दी गई है, जबकि पदेन और विशेष आमंत्रित सदस्य जोड़कर कुल 19 नेताओं की टीम बनाई गई है. यही टीम आगामी चुनाव में रणनीति बनाने और उसे लागू करने का काम करेगी.
समिति में शामिल किए गए बड़े नाम
इस प्रदेश चुनाव समिति में डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल, सम्राट चौधरी, विजय कुमार सिन्हा, राधा मोहन सिंह, गिरिराज सिंह, नंदकिशोर यादव, नित्यानंद राय, मंगल पांडेय, डॉ. संजय जायसवाल, भीखूभाई दलसानिया, रविशंकर प्रसाद, रेणु देवी, प्रेम कुमार, जनक चमार और प्रेम रंजन पटेल का नाम शामिल किया गया है.
पदेन सदस्य के रूप में धर्मशिला गुप्ता को मिली जगह
वहीं इस समिति में पदेन सदस्य के रूप में धर्मशिला गुप्ता को जगह दी गई है. जबकि विशेष आमंत्रित सदस्यों में विनोद तावड़े, दीपक प्रकाश और नागेंद्र जी को शामिल किया गया है. इसी तरह से बीजेपी ने अलग-अलग स्तर और पृष्ठभूमि के नेताओं को समिति में जगह देकर संतुलन साधने की कोशिश की है.
45 सदस्यीय चुनाव अभियान समिति भी बनाई गई
इस प्रदेश चुनाव समिति के साथ-साथ बीजेपी ने चुनाव प्रचार को और धार देने के लिए 45 सदस्यीय चुनाव अभियान समिति भी बनाई है. इसमें केंद्रीय और राज्य स्तर के मंत्री, सांसद, विधायक, पूर्व सांसद और संगठन के वरिष्ठ नेताओं को शामिल किए गए हैं. इस समिति की कमान प्रदेश अध्यक्ष डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल के हाथों में सौंपी गई है.
इसे भी पढ़ें : UP बना अमीरों का हब, 57 हजार से ज्यादा करोड़पति परिवार, चार साल में दोगुनी हुई अमीरों की तादाद
प्रचार रणनीति और समन्वय की होगी जिम्मेदारी
फिलहाल बीजेपी की चुनाव अभियान समिति का मुख्य काम प्रचार अभियान की रूपरेखा तैयार करना और उसे बूथ स्तर तक प्रभावी तरीके से लागू करना होगा. साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय नेतृत्व से आने वाले अन्य बड़े नेताओं के बिहार दौरे और प्रचार का पूरा समन्वय भी यही समिति देखेगी.
विकास और सुशासन पर किया गया फोकस
इसको लेकर बीजेपी ने साफ कर दिया है कि बिहार चुनाव में उसका मुख्य फोकस विकास और सुशासन होगा. वहीं पार्टी का लक्ष्य एनडीए के साथ मिलकर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाना है. हालांकि सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन को ध्यान में रखकर बनाई गई इन समितियों से बीजेपी को उम्मीद है कि चुनाव प्रचार और संगठनात्मक कामकाज में तेजी आएगी और मतदाताओं तक पार्टी का संदेश मजबूती से पहुंचेगा.