बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आते ही बीजेपी मुख्यालय का माहौल त्योहार की तरह रोशन हो गया और जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मंच पर पहुंचे, उनका मशहूर गमछा लहराने वाला अंदाज़ फिर पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया. मोदी ने छठी मइया की जय के साथ भाषण शुरू किया और कहा कि बिहार की जनता ने इस बार सचमुच गर्दा उड़ा दिया है. जनता ने साफ बता दिया है कि उनकी पसंद विकास, स्थिरता और सुशासन है, इसलिए उन्होंने फिर एक बार NDA की सरकार चुन ली है, मोदी ने कहा कि जंगलराज और कट्टा-राज का दौर अब बिहार की राजनीति से हमेशा के लिए खत्म हो चुका है क्योंकि राज्य के लोगों ने नए बिहार का सपना देखकर वोट दिया है. उन्होंने ये भी कहा कि यह जीत लोकतंत्र की भी जीत है, जिसने रिकॉर्ड मतदान और शांतिपूर्ण चुनावों के जरिए पूरे देश के सामने एक मिसाल पेश की है.
PM ने MY समीकरण की निकाली हवा
प्रधानमंत्री मोदी ने इस जीत का श्रेय बिहार के नए MY फॉर्मूले महिला और यूथ को दिया और विपक्ष के पुराने MY यानी मुस्लिम-यादव समीकरण की हवा निकाल दी. उन्होंने कहा कि बिहार की महिलाओं ने पहली बार इतने बड़े पैमाने पर NDA के विकास मॉडल पर भरोसा जताया है और युवाओं ने जातीय राजनीति को पूरी तरह खारिज कर दिया है. मोदी ने साफ कहा कि बिहार अब पुरानी सोच से बाहर निकल चुका है और युवा अब रोजगार, इंफ्रास्ट्रक्चर और अवसरों की राजनीति चाहते हैं. उन्होंने बिहार के युवाओं को इस बदलाव का सबसे बड़ा ब्रांड एंबेसडर बताते हुए कहा कि यह फैसला आने वाले समय में राज्य की दिशा बदल देगा.
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लोगों की टीम ने लिखी जीत की पटकथा
NDA की इस जबरदस्त जीत के पीछे बीजेपी के हाई-टेक सेंट्रल वॉर रूम की बड़ी भूमिका रही, जहां 300 से ज्यादा लोगों की टीम छह महीने तक लगातार 24x7 काम करती रही. हर विधानसभा क्षेत्र से मिनट-टू-मिनट रिपोर्ट आती थी और उसी आधार पर नई रणनीति तैयार होती थी. डोर-टू-डोर कैंपेन, लाभार्थियों की मैपिंग, बूथ-लेवल एजेंटों की रियल-टाइम वोट मॉनिटरिंग और डिजिटल ट्रैकिंग ऐप्स इस जीत के असली हथियार बने. महिलाओं के लिए 10,000 रुपये की डायरेक्ट बेनिफिट योजना भी इसी वॉर रूम की तैयार की गई रणनीति का हिस्सा थी, जिसने महिला मतदाताओं को अभूतपूर्व रूप से NDA के पक्ष में खड़ा कर दिया. बीजेपी ने ये भी सुनिश्चित किया कि उनका हर समर्थक बूथ तक पहुंचे और एक भी वोट न छूटे.
विपक्ष बिखरा, NDA को मिला फायदा
वहीं दूसरी ओर विपक्ष शुरुआत से ही बिखरा, भ्रमित और नेतृत्वहीन नजर आया. कांग्रेस न तो कानून-व्यवस्था और एंटी-इनकम्बेंसी जैसे अहम मुद्दों पर बात कर पाई और न ही बिहार के लिए कोई ठोस विज़न दे सकी. राजद पुरानी सामाजिक न्याय की राजनीति में उलझा रह गया, जबकि नए युवा मतदाता विकास और रोजगार पर वोट दे रहे थे. महागठबंधन ना तो मजबूत रणनीति बना पाया और ना ही स्पष्ट संदेश दे सका. यही वजह रही कि बिहार की जनता ने NDA को 2010 से भी ज्यादा बड़ी जीत दी और विपक्ष को राजनीति की सबसे कठिन सीख कि सिर्फ नारों से नहीं, ज़मीन पर काम और विश्वसनीयता से चुनाव जीते जाते हैं.