Bihar Elections: प्रशांत किशोर की अगुवाई वाली जनसुराज पार्टी ने हाल ही में हुए बिहार विधानसभा चुनाव को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। पार्टी का आरोप है कि चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता लागू होने के बावजूद राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत लाखों महिला लाभार्थियों के खातों में सीधे 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किए। जनसुराज का कहना है कि इस कदम से चुनाव प्रक्रिया प्रभावित हुई और मतदाताओं को अनुचित रूप से प्रभावित किया गया।
आचार संहिता के दौरान पैसा ट्रांसफर पर सवाल
याचिका में कहा गया है कि चुनाव कार्यक्रम घोषित होने के बाद भी 25 से 35 लाख महिलाओं के खातों में राशि भेजी गई। इसके साथ ही नए लाभार्थियों को भी योजना में जोड़ा गया, जो नियमों के खिलाफ है। जनसुराज ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया को कमजोर करने वाला कदम बताया है।
संवैधानिक उल्लंघन का आरोप
जनसुराज ने अनुच्छेद 32 के तहत दाखिल रिट याचिका में दावा किया है कि यह पूरा मामला संविधान के अनुच्छेद 14, 21, 112, 202 और 324 का उल्लंघन है। पार्टी ने कोर्ट से मांग की है कि आचार संहिता के दौरान डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर को गैरकानूनी घोषित किया जाए।
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चुनाव आयोग की भूमिका पर उठे सवाल
याचिका में चुनाव आयोग को भी कटघरे में खड़ा किया गया है। जनसुराज का कहना है कि आयोग को रिप्रेजेंटेशन ऑफ पीपल्स एक्ट की धारा 123 के तहत कार्रवाई करनी चाहिए थी। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि स्वयं सहायता समूह जीविका से जुड़ी 1.8 लाख महिलाओं की चुनाव ड्यूटी भी नियमों के खिलाफ थी।
फिर से चुनाव कराने की मांग
जनसुराज ने सुप्रीम कोर्ट से बिहार विधानसभा चुनाव रद्द कर दोबारा चुनाव कराने की मांग की है। इसके अलावा पार्टी ने सुझाव दिया है कि सत्ताधारी दलों के लिए मुफ्त और कल्याणकारी योजनाओं की घोषणा चुनाव से कम से कम छह महीने पहले तय की जाए, ताकि निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित हो सके। अब इस मामले पर मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच सुनवाई करेगी।