बिहार में गंगा समेत कई प्रमुख नदियों के जलस्तर में लगातार वृद्धि और तेज कटाव ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राज्य के कई जिलों में नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे निचले इलाकों में पानी फैलने लगा है। पश्चिम चंपारण, भोजपुर, खगड़िया, भागलपुर, रोहतास सहित कई जिलों में बाढ़ और कटाव की स्थिति को देखते हुए प्रशासन अलर्ट है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर का निरीक्षण कर संभावित बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की और अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जलस्तर खतरे के निशान से 219 सेंटीमीटर ऊपर
सीएम ने कहा कि बाढ़ की स्थिति में आमजन को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए सभी व्यवस्थाएं समय रहते पूरी कर ली जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जन-धन की सुरक्षा राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार पटना के गांधीघाट में गंगा का जलस्तर गुरुवार सुबह छह बजे खतरे के निशान से 158 सेंटीमीटर ऊपर था और शुक्रवार सुबह तक इसमें 19 सेंटीमीटर की और वृद्धि की संभावना है। दीघाघाट में गंगा खतरे के निशान से 113 सेंटीमीटर और हाथीदह में 116 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। श्रीपालपुर में भी गंगा का जलस्तर खतरे के निशान से 219 सेंटीमीटर ऊपर दर्ज किया गया।
सोन नदी भी कई स्थानों पर उफान पर है। पटना के मनेर में सोन का जलस्तर खतरे के निशान से 135 सेंटीमीटर ऊपर था। भोजपुर के कोइलवर में जलस्तर खतरे के निशान से 18 सेंटीमीटर नीचे दर्ज हुआ, जहां अगले 24 घंटे में कमी का अनुमान है। गंगा के अलावा घाघरा, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती और कोसी के जलस्तर में भी वृद्धि दर्ज की गई है।
गंगा 74 सेंटीमीटर ऊपर बह रही
गोपालगंज के डुमरियाघाट में गंडक खतरे के निशान से 70 सेंटीमीटर ऊपर थी। खगड़िया में बूढ़ी गंडक 61 सेंटीमीटर, जबकि बलतारा में कोसी 120 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी। कटिहार के कुरसेला में कोसी 62 सेंटीमीटर ऊपर थी। सिवान के दरौली में घाघरा 21 सेंटीमीटर और भागलपुर के कहलगांव में गंगा 74 सेंटीमीटर ऊपर बह रही थी।
100 एकड़ से अधिक जमीन फसल समेत नदी में समा चुकी
उधर, पश्चिम चंपारण में नेपाल के तराई क्षेत्र में लगातार बारिश से गंडक नदी का जलस्तर बढ़ गया है। योगापट्टी के सिसवा मंगलपुर, चौमुखा और जरलपुर में तेज कटाव के कारण 100 एकड़ से अधिक जमीन फसल समेत नदी में समा चुकी है। खगड़िया में गंगा, गंडक और बागमती के बढ़ते जलस्तर से निचले इलाकों में बाढ़ का दायरा बढ़ रहा है। भोजपुर के निचले क्षेत्रों में भी पानी फैल गया है।