बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजों ने यह साफ कर दिया है कि प्रदेश में अगली सरकार एनडीए की बनने जा रही है, लेकिन मुख्यमंत्री कौन होगा—इस पर अभी भी सस्पेंस बरकरार है। नीतीश कुमार एक बार फिर कुर्सी संभालेंगे या गठबंधन कोई नया चेहरे पर भरोसा जताएगा, इस पर आज दिनभर हलचल जारी है। तमाम दलों के नेता सीएम आवास पहुंच रहे हैं, जबकि एनडीए घटक दलों के बयान राजनीतिक संकेत दे रहे हैं।
नीतीश कुमार के घर बढ़ी हलचल, दिनभर रहेगी बैठकों की रफ्तार
चुनाव नतीजों के बाद से ही पटना में राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। सुबह से ही जेडीयू के विधायक और कई वरिष्ठ नेता नीतीश कुमार के आवास पहुंचे। इसके साथ ही केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने भी मुलाकात कर बधाई दी। नीतीश कुमार आज कई दौर की बैठकें करेंगे, जिनमें एनडीए के घटक दलों के साथ सरकार गठन और नेतृत्व को लेकर चर्चा जारी रहेगी।
चिराग पासवान ने नीतीश को जीत की बधाई दी
चिराग पासवान ने मुलाकात के बाद कहा कि एनडीए ने नीतीश कुमार के नेतृत्व में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी ने मतदान के दौरान गठबंधन की मजबूती के लिए सहयोग दिया और कई सीटों पर जेडीयू ने भी लोजपा (रालोद) के उम्मीदवारों का समर्थन किया। चिराग ने कहा कि “जो लोग दोनों दलों के रिश्तों को लेकर भ्रम फैला रहे थे, उनकी बातें झूठी साबित हुई हैं।”
जीतन राम मांझी बोले—बिहार में ‘अच्छे दिन’ की शुरुआत
केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी ने कहा कि बिहार में पलायन की समस्या को गंभीरता से समझा गया है और अब निवेश बढ़ेगा ताकि युवाओं को रोजगार मिले। उनका कहना था कि प्रधानमंत्री और एनडीए नेतृत्व ने बड़े जनादेश को जिम्मेदारी के रूप में लिया है और अगले पांच साल बिहार के विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण होंगे।
शांभवी चौधरी ने कहा—युवा और महिलाएं खुद को सशक्त महसूस कर रहे
लोजपा (रामविलास) की सांसद शांभवी चौधरी ने कहा कि बिहार की जनता ने ‘जंगलराज’ को नकारते हुए एनडीए की नीतियों पर भरोसा जताया है। उन्होंने कहा कि पिछले दो दशकों में महिलाओं और युवाओं को सशक्त करने के लिए बड़े कदम उठाए गए, जिसका असर चुनाव परिणामों में साफ दिखता है।
सीएम कौन—फैसला जल्द!
एनडीए में आम सहमति बनते ही मुख्यमंत्री के नाम की औपचारिक घोषणा की जाएगी। हालांकि नीतीश कुमार अभी भी दावेदारों की सूची में सबसे आगे हैं, लेकिन सस्पेंस पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।
सभी की निगाहें एनडीए की बैठक और राज्यपाल के पास जाने की संभावित कवायद पर टिकी हैं।