Paper Leaks And Cheating: बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल और दूसरी गड़बड़ियों पर रोक लगाने के लिए 5 सदस्यीय विशेष समिति बनाने का ऐलान किया है। इस संबंध में सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से अधिसूचना जारी की गई है। समिति राज्य की मौजूदा परीक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा करेगी और उसमें सुधार के लिए सुझाव देगी। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी, सुरक्षित और भरोसेमंद बनाना है।
कई तरह की परीक्षाएं होंगी समीक्षा के दायरे में
विशेष समिति माध्यमिक और उच्च माध्यमिक परीक्षाओं के अलावा विश्वविद्यालय, व्यावसायिक और तकनीकी परीक्षाओं की भी समीक्षा करेगी। प्रवेश एवं पात्रता परीक्षाओं के साथ भर्ती और प्रतियोगी परीक्षाओं को भी इसके दायरे में रखा गया है। समिति प्रश्न पत्र लीक, नकल और परीक्षा से जुड़ी अन्य अनियमितताओं को रोकने के लिए मौजूदा व्यवस्था का आकलन करेगी। इसके साथ ही परीक्षा संचालन में आने वाली कमियों की पहचान कर सुधार के उपाय सुझाए जाएंगे।
एआई और साइबर सुरक्षा पर भी रहेगा जोर
सरकार परीक्षा प्रणाली में आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की तैयारी में है। समिति परीक्षा प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक और साइबर सुरक्षा को शामिल करने की संभावनाओं पर भी सुझाव देगी। साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों और डिजिटल सुविधाओं से कम जुड़े विद्यार्थियों की जरूरतों को ध्यान में रखने पर जोर दिया जाएगा। सरकार चाहती है कि तकनीकी बदलाव के बावजूद किसी वर्ग के विद्यार्थियों को परेशानी का सामना न करना पड़े।
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सेवानिवृत्त न्यायाधीश कर सकते हैं समिति की अध्यक्षता
राज्य सरकार की ओर से सुप्रीम कोर्ट या हाईकोर्ट के किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश से समिति की अध्यक्षता करने का अनुरोध किया जाएगा। समिति परीक्षा बोर्डों, आयोगों, विश्वविद्यालयों, विभागों, जिला प्रशासन और परीक्षा केंद्रों की भूमिका की भी समीक्षा करेगी। परीक्षा प्रक्रिया में किसी स्तर पर लापरवाही या गड़बड़ी होने पर जवाबदेही तय करने और जरूरी सुधारों को लेकर भी समिति अपनी सिफारिश देगी।
समय पर परीक्षा और रिजल्ट के लिए कैलेंडर पर सुझाव
समिति परीक्षा, मूल्यांकन और परिणाम जारी करने में होने वाली देरी के कारणों की भी पड़ताल करेगी। इसके साथ राज्य के लिए एक समयबद्ध परीक्षा कैलेंडर तैयार करने की सिफारिश की जा सकती है। इसमें आवेदन से लेकर एडमिट कार्ड, परीक्षा, उत्तर कुंजी, आपत्तियों के निपटारे, मूल्यांकन और रिजल्ट जारी करने तक अलग-अलग चरणों के लिए अधिकतम समय सीमा तय करने का सुझाव शामिल हो सकता है। सरकार का लक्ष्य ऐसी परीक्षा व्यवस्था तैयार करना है जो योग्यता आधारित होने के साथ सुरक्षित, तकनीकी रूप से मजबूत और जवाबदेह भी हो।