बिहार में 20 नवंबर को नई सरकार के शपथ ग्रहण का दिन तय हो चुका है, लेकिन उससे पहले दिल्ली में सत्ता समीकरणों पर मंथन तेज हो गया है। डिप्टी सीएम, स्पीकर और मंत्रियों के विभागों के बंटवारे को लेकर शीर्ष नेतृत्व के बीच लगातार बैठकें चल रही हैं। दिल्ली में हुई चर्चाओं ने साफ कर दिया है कि सत्ता साझेदारी का फार्मूला बेहद बारीकी से तय किया जा रहा है और दोनों दल अपनी-अपनी हिस्सेदारी को लेकर सक्रिय हैं।
दिल्ली में सत्ता का गणित तय करने की कवायद
शपथ ग्रहण से पहले राजधानी दिल्ली में दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं की बैठकों ने निर्णय प्रक्रिया को तेज कर दिया है। चर्चा में विधानसभा अध्यक्ष पद, दो उपमुख्यमंत्री, मंत्रियों की संख्या और जातीय समीकरण को प्राथमिकता दी जा रही है। बताया जा रहा है कि शक्ति संतुलन बनाते हुए ऐसी संरचना तैयार की जा रही है, जिसमें दोनों दलों की बराबर की भागीदारी बनी रहे।
स्पीकर पद पर बढ़ी राजनीतिक खींचतान
विधानसभा अध्यक्ष पद को लेकर दोनों दल अपनी दावेदारी बनाए हुए हैं। एक पक्ष का तर्क है कि परिषद सभापति पद पहले से ही एक पार्टी के पास है, तो दूसरी पार्टी को अध्यक्ष पद मिलना चाहिए। वहीं दूसरी ओर राय यह भी है कि मुख्यमंत्री पद जिस दल के पास है, अध्यक्ष पद स्वाभाविक रूप से उसके हिस्से में जाना चाहिए। चर्चा है कि यह पद फिलहाल उसी दल के पास रह सकता है जिसके पास यह पहले था।
दो उपमुख्यमंत्री के फॉर्मूले पर सहमति के संकेत
नए मंत्रिमंडल में दो उपमुख्यमंत्रियों की भूमिका लगभग तय मानी जा रही है। पहले नामों में बदलाव की संभावनाएं हैं और कुछ नए चेहरे शामिल हो सकते हैं। जातीय संतुलन को ध्यान में रखते हुए मंत्रियों के चयन की प्रक्रिया जारी है, जिसमें फॉरवर्ड, ओबीसी, ईबीसी और एससी समाज की भागीदारी को मुख्य आधार बनाया गया है।
नए चेहरों की एंट्री और सहयोगी दलों की हिस्सेदारी
नई कैबिनेट में कुछ नए नेताओं को अवसर मिल सकता है। कुछ विधायकों को पहली बार मंत्री बनाए जाने की चर्चाएं मजबूत हैं। वहीं सहयोगी दलों को उनकी सीटों और प्रभाव के हिसाब से प्रतिनिधित्व दिया जाएगा। छोटे दलों से भी 1-1 मंत्री लिए जाने की संभावना है। अधिकतर मौजूदा मंत्रियों को फिर से जिम्मेदारी मिलने के संकेत हैं।
शपथ ग्रहण के दो संभावित मॉडल
शपथ ग्रहण को लेकर दो तरह के प्रस्तावों पर विचार चल रहा है। एक प्रस्ताव के अनुसार, मुख्यमंत्री, दो उपमुख्यमंत्री और कुछ चुनिंदा मंत्री पहले शपथ लेंगे। जबकि दूसरे फॉर्मूले में 20 से अधिक मंत्रियों के साथ सामूहिक शपथ समारोह की संभावना है। अंतिम निर्णय दिल्ली की बैठकों के बाद ही तय होगा।