बिहार में नई एनडीए सरकार के शपथ ग्रहण के बाद यह साफ हो गया है कि किस पार्टी को उसकी सीटों के मुकाबले कितना प्रतिनिधित्व मिला है। नीतीश कुमार ने रिकॉर्ड 10वीं बार मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, जबकि बीजेपी के दो नेताओं को उपमुख्यमंत्री बनाया गया। दिलचस्प बात यह है कि कैबिनेट में मंत्री पदों का समीकरण सिर्फ बड़ी पार्टियों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि छोटी पार्टियों को भी उनकी संख्या से ज्यादा लाभ मिलता नजर आया।
NDA के पास कितनी सीटें – किसका कितना दम?
बिहार विधानसभा में एनडीए के कुल 202 विधायक हैं। इनमें बीजेपी 89 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी है, जबकि जेडीयू के पास 85 सीटें हैं। इनके अलावा एलजेपी (रामविलास) के 19, हम के 5 और आरएलएम के 4 विधायक हैं। सीटों के इस बंटवारे में जेडीयू और बीजेपी मजबूत स्थिति में जरूर हैं, लेकिन मंत्रियों की लिस्ट इसका थोड़ा अलग चित्र दिखाती है।
जेडीयू को मिला संतुलित प्रतिनिधित्व
जेडीयू के खाते में कुल 9 मंत्री बने हैं, जिसमें मुख्यमंत्री नीतीश कुमार भी शामिल हैं। पार्टी के वरिष्ठ चेहरे—विजय कुमार चौधरी, विजेंद्र यादव, श्रवण कुमार, लेशी सिंह, अशोक चौधरी, मदन सहनी, सुनील कुमार और मोहम्मद जमा खान को जगह मिली है। सीटों की तुलना में जेडीयू को एक संतुलित और पर्याप्त हिस्सा माना जा रहा है।
बीजेपी आगे, लेकिन अनुपात में थोड़ी कमी
बीजेपी को दो उपमुख्यमंत्री के साथ कुल 14 मंत्री पद मिले हैं। पार्टी के मंगल पांडे, नितिन नवीन, दिलीप जायसवाल, रमा निषाद, श्रेयसी सिंह सहित 12 नेताओं को शपथ दिलाई गई। संख्या के हिसाब से बीजेपी सबसे आगे है, लेकिन 89 सीटों के मुकाबले प्रति सीट मंत्री का अनुपात जेडीयू से थोड़ा कम बैठता है।
छोटी पार्टियों की चांदी – सीट कम, पद ज्यादा
लोजपा (रामविलास) ने 19 सीटें जीतकर दो मंत्री पद हासिल किए, जिसे मजबूत सौदेबाजी माना जा रहा है। हम को पांच सीटों पर एक मंत्री पद और आरएलएम को चार सीटों पर भी एक मंत्री पद मिला है। छोटे दलों के लिए यह प्रतिनिधित्व काफी प्रभावी माना जा रहा है।