प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हालिया वियतनाम यात्रा के दौरान भारत की सांस्कृतिक और कृषि विरासत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर विशेष पहचान हासिल की। राष्ट्रपति तो लाम को भेंट किए गए बिहार के पारंपरिक उत्पादों ने न केवल देश की समृद्ध खाद्य परंपरा को सामने रखा, बल्कि किसानों और कारीगरों की मेहनत को भी वैश्विक सम्मान दिलाया। हाजीपुर का केला, सिलाव का खाजा, मिथिला का मखाना और गया के पारंपरिक व्यंजन इस राजकीय पहल का हिस्सा बने, जिसने भारत की ‘गिफ्ट डिप्लोमेसी’ को एक नई पहचान दी।
हाजीपुर का मालभोग केला: मिठास और सुगंध की पहचान
हाजीपुर का मालभोग केला अपनी विशिष्ट सुगंध, मुलायम बनावट और प्राकृतिक मिठास के लिए जाना जाता है। गंगा और गंडक के उपजाऊ मैदानों में उगने वाला यह केला बिहार की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय मंच पर इसे उपहार के रूप में शामिल किए जाने से वैशाली क्षेत्र के किसानों में नई ऊर्जा और उत्साह देखने को मिला है।
सिलाव का खाजा: 52 परतों वाली मीठी विरासत
नालंदा जिले के सिलाव का खाजा अपनी 52 पतली परतों और कुरकुरे स्वाद के कारण विश्व प्रसिद्ध है। मैदा, घी और चीनी से तैयार यह पारंपरिक मिठाई बिहार की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। राजकीय भोज में इसे शामिल किए जाने से इस GI-टैग उत्पाद को वैश्विक पहचान मिलने की संभावनाएं और मजबूत हुई हैं।
मिथिला का मखाना: स्वास्थ्य और स्वाद का संगम
मिथिला क्षेत्र का मखाना, जिसे ‘व्हाइट गोल्ड’ भी कहा जाता है, अब वैश्विक सुपरफूड की श्रेणी में अपनी जगह बना चुका है। प्रोटीन, कैल्शियम और फाइबर से भरपूर यह उत्पाद स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभकारी माना जाता है। वियतनाम के राष्ट्रपति को भेंट किए गए इस उत्पाद ने भारत की कृषि विविधता को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उजागर किया।
गया के तिलकुट और अनरसा: परंपरा और आस्था का स्वाद
गया यात्रा के दौरान वियतनामी राष्ट्रपति को तिलकुट और अनरसा जैसे पारंपरिक व्यंजन भी भेंट किए गए। तिलकुट की कुरकुरी बनावट और अनरसा की मिठास बिहार की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपरा को दर्शाती है। महाबोधि मंदिर दर्शन के साथ यह अनुभव सांस्कृतिक आदान-प्रदान का महत्वपूर्ण हिस्सा बना।
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भारत की इस कूटनीतिक पहल ने बिहार के स्थानीय उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाने का मार्ग प्रशस्त किया है। यह केवल उपहार नहीं, बल्कि भारत की मिट्टी, संस्कृति और मेहनतकश किसानों की पहचान का प्रतिनिधित्व है, जिसने वैश्विक मंच पर एक नई छाप छोड़ी है।