बिहार विधानसभा चुनाव के बीच समस्तीपुर जिले के सरायरंजन में केएसआर कॉलेज के पास सड़क पर VVPAT (Voter Verifiable Paper Audit Trail) पर्चियां बिखरी मिलीं। जिससे चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ गए। घटना का वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल होते ही विपक्षी दलों ने निर्वाचन आयोग पर गंभीर आरोप लगाए।
EVM से निकली VVPAT पर्चियां सड़कों पर
राष्ट्रीय जनता दल (RJD) ने इसे लेकर चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता और निर्वाचन आयोग की साख पर सवाल उठाया। आरजेडी ने X पर पोस्ट किया, 'समस्तीपुर के सरायरंजन विधानसभा क्षेत्र के KSR कॉलेज के पास सड़क पर भारी संख्या में EVM से निकलने वाली VVPAT पर्चियां फेंकी मिलीं। कब, कैसे, क्यों किसके इशारे पर इन पर्चियों को फेंका गया? क्या चोर आयोग इसका जवाब देगा? क्या यह सब बाहर से आकर बिहार में डेरा डाले लोकतंत्र के डकैत के निर्देश पर हो रहा है?
मामले में CEC का सख्त आदेश
विवाद बढ़ता देख मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने तत्काल कार्रवाई करते हुए संबंधित सहायक रिटर्निंग ऑफिसर (ARO) को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया। साथ ही उनके खिलाफ FIR दर्ज करने के निर्देश जारी किए गए हैं। आयोग ने स्पष्ट किया कि ये पर्चियां मॉक पोल के दौरान उपयोग की गई थीं, जिनका निस्तारण ठीक से नहीं किया गया। आयोग ने यह भी कहा कि वास्तविक मतदान प्रक्रिया की अखंडता पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है।
डीएम और एसपी मौके पर पहुंचे
समस्तीपुर के डीएम रोशन कुशवाहा ने मीडिया से बातचीत में बताया कि VVPAT की पर्चियां सड़क के किनारे बिखरी मिली हैं। मैं और पुलिस अधीक्षक मौके पर पहुंचे थे। जांच में पाया गया है मॉक पोल के बाद अधिक पर्ची काट दी गई थी, लेकिन कुछ पर्चियां बिना शेडिंग किये हुए पाई गई हैं। ईवीएम नंबर से जिम्मेदार मतदान कर्मी का पता चल जाएगा। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। सरायरंजन सीट पर चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी भी मौके पर आए थे। उन्हें हमने सूचित किया कि ये मॉक पोल के समय निकली पर्चियां हैं जिनके निस्तारण में लापरवाही बरती गई है। असिस्टेंट रिटर्निंग ऑफिसर को निलंबित कर दिया गया है और उनके खिलाफ FIR दर्ज की जाएगी।
6 नवंबर को पहले चरण का हुआ था मतदान
जानकारी के अनुसार बिहार विधानसभा चुनाव में 6 नवंबर को सरायरंजन सीट पर पहले चरण का मतदान हुआ था। मतदान से पूर्व प्रत्येक बूथ पर मॉक पोल किया जाता है, ताकि मशीनों की कार्यप्रणाली की जांच हो सके। मगर इस बार मॉक पोल की पर्चियां सही तरीके से नष्ट नहीं की गईं, जिससे यह विवाद खड़ा हो गया।
फिलहाल, जिला प्रशासन ने सभी प्रत्याशियों को लिखित रूप से सूचित किया है कि बरामद पर्चियां वास्तविक मतदान से जुड़ी नहीं हैं। निर्वाचन आयोग ने मामले की विस्तृत रिपोर्ट तलब की है और यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं कि भविष्य में ऐसी लापरवाही दोबारा न हो।