बंगाल की खाड़ी बहु क्षेत्रीय तकनीकी एवं आर्थिक सहयोग पहल (बिम्सटेक) का पहला समुद्री सुरक्षा अभ्यास अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के श्री विजयपुरम में सफलतापूर्वक संपन्न हो गया। रक्षा मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि इसमें भारत, म्यांमार और श्रीलंका की नौसेनाओं ने हिस्सा लिया।
नेतृत्व वाइस एडमिरल विनीत मैकार्थी कर रहे हैं
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह अभ्यास 30 अक्टूबर से 3 नवंबर तक अंडमान और निकोबार कमांड (एएनसी) के नेतृत्व में आयोजित किया गया। एएनसी भारत का एकमात्र संयुक्त संचालन (ट्राई-सर्विस) कमांड है और इसका नेतृत्व वाइस एडमिरल विनीत मैकार्थी कर रहे हैं।
समुद्री सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखना जरूरी
मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर कहा, इस अभ्यास के सफल समापन ने बंगाल की खाड़ी क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए सदस्य देशों की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाया है। अभ्यास में भारतीय नौसेना के आईएनएस तारागिरी, आईएनएस कर्मुक और आईएनएस सरयू ने हिस्सा लिया। इसके अलावा म्यांमार नौसेना के यूएमएस किंग आंग जेया और श्रीलंका नौसेना के एसएलएनएस गजबाहु भी इसमें शामिल रहे।
इस कार्यक्रम में कई वरिष्ठ अधिकारी और विशिष्ट प्रतिनिधि शामिल हुए। इनमें बिम्सटेक के महासचिव इंद्र मणि पांडे, भारत के राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा समन्वयक वाइस एडमिरल बिस्वजीत दासगुप्ता (सेवानिवृत्त), म्यांमार नौसेना के केंद्रीय कमान के प्रमुख रियर एडमिरल क्याव क्याव हटू, श्रीलंका के बंदरगाह और नागरिक उड्डयन मंत्रालय के एयर वाइस मार्शल एमडीआर प्रसाद (सेवानिवृत्त) और बांग्लादेशी नौसेना के जहाज बीएनएस प्रोटॉय के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन मोहम्मद मंजुरुल इस्लाम शामिल थे।
विजय पुरम में उच्च स्तरीय बैठक
यह अभ्यास उन प्रमुख पहलों में से एक है, जिनकी घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष थाईलैंड में आयोजित छठे बिम्सटेक शिखर सम्मेलन के दौरान की थी। अभ्यास के पहले चरण में विजय पुरम में उच्च स्तरीय बैठकों, पेशेवर चर्चाओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। इससे भाग लेने वाले देशों को आपसी सहयोग बढ़ाने और आपसी संबंध मजबूत करने का अवसर मिला।
अभियानों और समन्वित गतिविधियों को अंजाम
इसके बाद 2 और 3 नवंबर को समुद्र में अभ्यास का दूसरा चरण आयोजित किया गया। इसमें विभिन्न देशों की नौसेनाओं ने मिलकर समुद्री अभियानों और समन्वित गतिविधियों को अंजाम दिया। इसका उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षित और स्थिर समुद्री वातावरण को बढ़ावा देना था। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि इस पहले समुद्री सुरक्षा अभ्यास का सफल समापन बिम्सटेक सदस्य देशों के बीच समुद्री सहयोग को संस्थागत रूप देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।