देश में जन्म और मृत्यु पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। संसद के दोनों सदनों से जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक को मंजूरी मिल गई है। नए प्रावधानों के तहत अब देरी से होने वाले पंजीकरण के लिए पहले की तुलना में अधिक सख्त प्रक्रिया अपनानी होगी। सरकार का कहना है कि इससे फर्जी पंजीकरण पर रोक लगेगी और समय पर रजिस्ट्रेशन को बढ़ावा मिलेगा।
राज्यसभा से भी मिली विधेयक को मंजूरी
लोकसभा से पारित होने के बाद मंगलवार को राज्यसभा ने भी जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक को ध्वनिमत से मंजूरी दे दी। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सदन में विधेयक पेश करते हुए बताया कि इसका उद्देश्य जन्म और मृत्यु पंजीकरण अधिनियम, 1969 की धारा 13(3) में संशोधन करना है। सरकार के अनुसार, यह बदलाव देर से होने वाले पंजीकरण की प्रक्रिया को अधिक जवाबदेह और विश्वसनीय बनाएगा।
एक से दो साल की देरी पर मिलेगी सक्षम अधिकारी की अनुमति
नए कानून के तहत यदि किसी जन्म या मृत्यु की सूचना घटना के एक वर्ष बाद लेकिन दो वर्ष के भीतर दी जाती है, तो उसका पंजीकरण सामान्य प्रक्रिया से नहीं होगा। इसके लिए संबंधित जिला मजिस्ट्रेट (DM), उप जिला मजिस्ट्रेट (SDM) या जिला मजिस्ट्रेट द्वारा अधिकृत कार्यकारी मजिस्ट्रेट की अनुमति लेना अनिवार्य होगा। अनुमति देने से पहले संबंधित जानकारी और दस्तावेजों की जांच भी की जाएगी।
दो साल से अधिक देरी होने पर लागू होगा नया नियम
यदि जन्म या मृत्यु की घटना के दो वर्ष से अधिक समय बाद पंजीकरण कराया जाता है, तो अब केवल प्रशासनिक अनुमति पर्याप्त नहीं होगी। ऐसे मामलों में प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट (JMFC) के आदेश के बाद ही पंजीकरण किया जा सकेगा। सरकार का मानना है कि इससे फर्जी दस्तावेजों के आधार पर होने वाले पंजीकरण पर प्रभावी रोक लग सकेगी और रिकॉर्ड की विश्वसनीयता बढ़ेगी।
लोकसभा में भी हंगामे के बीच हुआ था पारित
यह विधेयक इससे पहले 31 जुलाई को लोकसभा से भी पारित हो चुका है। उस दौरान विपक्ष ने विधेयक पर विस्तृत चर्चा की मांग करते हुए गृह मंत्री की अनुपस्थिति पर आपत्ति जताई थी। हंगामे के बावजूद संक्षिप्त चर्चा के बाद गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सरकार का पक्ष रखा और विधेयक को सदन की मंजूरी मिल गई। अब संसद से पारित होने के बाद नए प्रावधान लागू होने का रास्ता साफ हो गया है।