ग्रेटर नोएडा। नोएडा के चर्चित बिसाहड़ा कांड मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से मुकदमा वापस लेने की अर्जी पर अब 23 दिसंबर को सुनवाई होगी। शासन और संयुक्त निदेशक अभियोजन के आदेश के बाद सहायक जिला शासकीय वकील (फौजदारी) ने अदालत में प्रार्थना पत्र दाखिल किया है। इसमें सामाजिक सद्भाव की बहाली को देखते हुए मुकदमा वापसी की अनुमति मांगी गई है।
इससे पहले 12 दिसंबर को हुई सुनवाई में अभियोजन पक्ष ने समय मांगा था, जिसके बाद अदालत ने नई तारीख तय की थी। अब दोपहर बाद सुनवाई होगी। शासनादेश 26 अगस्त 2025 को जारी हुआ था, जिसके आधार पर मुकदमा वापस लेने का निर्णय लिया गया। इसके बाद संयुक्त निदेशक अभियोजन गौतमबुद्धनगर ने 12 सितंबर को जिला शासकीय वकील को कार्रवाई के निर्देश दिए थे। राज्यपाल महोदया द्वारा अभियोजन वापसी की अनुमति प्रदान की गई थी। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा-321 के तहत यह अर्जी दाखिल की गई थी, जो 15 अक्टूबर को अदालत में प्रस्तुत हुई थी।
क्या था मामला
28 सितंबर 2015 की रात थाना जारचा क्षेत्र के बिसाहड़ा गांव में गोमांस सेवन की अफवाह फैलते ही भीड़ ने एक घर पर हमला कर दिया था। इस दौरान गांव निवासी अखलाक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, जबकि उसका बेटा दानिश गंभीर रूप से घायल हो गया था। यह घटना पूरे देश में सांप्रदायिक तनाव का कारण बनी और बिसाहड़ा गांव राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया।
अखलाक की पत्नी इकरामन ने दस लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई थी। प्राथमिकी में आरोप था कि आरोपी लाठी-डंडे और तमंचे लेकर घर में घुस आए और हमला किया। पुलिस ने जांच के बाद धारा 147, 148, 149, 307, 302, 323, 504, 506, 427, 458 भादंवि और 7 क्रिमिनल लॉ एक्ट के तहत केस दर्ज किया। गवाहों के बयानों में शुरुआती तौर पर 10 नाम थे, लेकिन बाद में अन्य 16 नाम और जोड़े गए।
केस की स्थिति
अखलाक की बेटी शाहिस्ता ने 26 नवंबर 2015 को दिए बयान में 16 आरोपियों का जिक्र किया, जबकि दानिश ने 5 दिसंबर को 19 लोगों के नाम बताए। विवेचक ने 22 दिसंबर 2015 को 18 आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था। फिलहाल सभी आरोपी जमानत पर रिहा हैं और केस साक्ष्य चरण में लंबित है।