Punjab Politics: पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणि अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात ने राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे दिया है। करीब 25 साल तक साथ रहने के बाद 2020 में अलग हुए दोनों दलों के रिश्तों को लेकर एक बार फिर अटकलें तेज हो गई हैं। हालांकि, दोनों पक्षों ने गठबंधन को लेकर अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।
दिल्ली में पीएम मोदी से मिले सुखबीर बादल
शिरोमणि अकाली दल के अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने शुक्रवार को संसद भवन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने बताया कि पंजाब की कानून-व्यवस्था और सरकारी योजनाओं में कथित भ्रष्टाचार जैसे मुद्दों पर चर्चा हुई।हालांकि बैठक का पूरा एजेंडा सार्वजनिक नहीं किया गया, लेकिन इस मुलाकात को पंजाब की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों के लिहाज से अहम माना जा रहा है।
क्या फिर बन सकता है बीजेपी-अकाली दल का गठबंधन?
प्रधानमंत्री और सुखबीर बादल की मुलाकात के बाद सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या पंजाब में बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल फिर से साथ आ सकते हैं। फिलहाल किसी भी दल ने गठबंधन की पुष्टि नहीं की है, लेकिन राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हैं।पंजाब विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण इस मुलाकात को संभावित राजनीतिक समीकरणों से जोड़कर देखा जा रहा है।
2020 में किसान आंदोलन के दौरान टूटा था 25 साल पुराना साथ
बीजेपी और शिरोमणि अकाली दल करीब ढाई दशक तक पंजाब की राजनीति में सहयोगी रहे। लेकिन 2020 में कृषि कानूनों के विरोध के दौरान अकाली दल ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) से अलग होने का फैसला लिया था।इसके बाद दोनों दलों ने 2022 के विधानसभा और 2024 के लोकसभा चुनाव अलग-अलग लड़े। इस दौरान दोनों को राजनीतिक नुकसान का सामना करना पड़ा।
2027 चुनाव से पहले दोनों दलों की अपनी-अपनी चुनौतियां
अकाली दल अपने पारंपरिक जनाधार को फिर से मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। वहीं बीजेपी भी पंजाब में संगठन का विस्तार कर अकेले दम पर मजबूत विकल्प बनने की रणनीति पर काम कर रही है।राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर दोनों दल फिर साथ आते हैं तो शहरी और ग्रामीण वोटों का पुराना समीकरण दोबारा बनने की संभावना बढ़ सकती है। हालांकि फिलहाल इसे लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
मुलाकात ने बढ़ाए सियासी संकेत, लेकिन फैसला अभी बाकी
सुखबीर बादल और प्रधानमंत्री मोदी की मुलाकात ने पंजाब की राजनीति में नई संभावनाओं को जरूर जन्म दिया है। लेकिन गठबंधन को लेकर अभी किसी भी तरह का आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।ऐसे में आने वाले दिनों में दोनों दलों की राजनीतिक गतिविधियों और बयानों पर सबकी नजर रहेगी।