SIR Controversy: SIR यानी मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर कांग्रेस और चुनाव आयोग के बीच चल रहे विवाद पर बीजेपी के कई मुख्यमंत्रियों ने विपक्ष पर निशाना साधा है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने चुनाव आयोग के मुद्दे पर कांग्रेस और राहुल गांधी के बयानों पर प्रतिक्रिया दी। इन नेताओं ने विपक्ष पर संवैधानिक संस्थाओं को लेकर सवाल उठाने और SIR को लेकर भ्रम फैलाने का आरोप लगाया।
योगी आदित्यनाथ ने SIR को लेकर क्या कहा?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को SIR को लेकर विपक्षी दलों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विपक्ष इस प्रक्रिया को लेकर लोगों के बीच भ्रम पैदा कर रहा है। योगी ने कहा कि चुनाव हारने के बाद चुनाव आयोग पर सवाल उठाना और जीत के समय उसी प्रक्रिया पर सवाल न उठाना उचित नहीं है। उन्होंने EVM और चुनाव आयोग को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवालों का भी जिक्र किया। योगी ने विपक्ष से संवैधानिक संस्थाओं के बारे में बयान देते समय तथ्यों और प्रक्रियाओं को ध्यान में रखने की बात कही।
हिमंत सरमा ने राहुल गांधी से मांगी माफी
असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने राहुल गांधी और कांग्रेस से चुनाव आयोग को लेकर लगाए गए आरोपों पर माफी मांगने की मांग की। सरमा ने कहा कि चुनाव आयोग की ओर से 26 सितंबर को जारी स्पष्टीकरण में SIR से जुड़े फैसलों को तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लिया गया बताया गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि फैसले सामूहिक रूप से लिए गए थे तो आयोग के खिलाफ अलग-अलग आरोप क्यों लगाए गए। सरमा ने कांग्रेस पर चुनाव हारने के बाद चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाने का भी आरोप लगाया। ये उनके राजनीतिक बयान हैं।
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फडणवीस ने भी राहुल गांधी पर साधा निशाना
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी SIR और चुनाव आयोग को लेकर राहुल गांधी के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयानों से लोगों के बीच चुनावी और संवैधानिक व्यवस्था को लेकर भ्रम पैदा हो सकता है। फडणवीस ने SIR से जुड़े आंकड़ों और चुनाव आयोग की प्रक्रिया का हवाला देते हुए राहुल गांधी के आरोपों पर सवाल उठाए। उन्होंने चुनाव आयोग को अपनी जिम्मेदारियों के लिए जवाबदेह संवैधानिक संस्था बताया।
धामी बोले- सवाल पूछना लोकतांत्रिक अधिकार
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि लोकतंत्र में सवाल पूछना राजनीतिक दलों का अधिकार है, लेकिन किसी आंतरिक विचार-विमर्श या आपत्ति को अंतिम संस्थागत निर्णय मानने से पहले पूरा रिकॉर्ड देखना जरूरी है। यह बयान ऐसे समय आया है जब चुनाव आयोग के भीतर SIR को लेकर कथित मतभेदों की रिपोर्ट सामने आई थीं। दूसरी ओर, आयोग ने 26 सितंबर को कहा कि उसके संबंधित फैसले सामूहिक सहमति से लिए गए। इस विवाद में कांग्रेस और बीजेपी की ओर से अलग-अलग दावे सामने आए हैं, इसलिए अंतिम स्थिति समझने के लिए आधिकारिक रिकॉर्ड और आयोग के फैसलों को देखना महत्वपूर्ण है।