भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने जिन राज्यों में उसकी सरकार है, वहां के मुख्यमंत्रियों के प्रदर्शन की समीक्षा शुरू कर दी है। इस समीक्षा में करीब छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों का कामकाज संतोषजनक नहीं पाया गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, भाजपा नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश, गुजरात, उत्तराखंड और गोवा के मुख्यमंत्रियों को लेकर गंभीर चिंतन शुरू कर दिया है।
योगी आदित्यनाथ पर जातीय संतुलन बिगाड़ने के आरोप
सबसे बड़ा नाम उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का है। सूत्रों की मानें तो योगी सरकार की कानून-व्यवस्था की स्थिति बेहतर हुई है, लेकिन भाजपा के कोर वोट बैंक – ब्राह्मण, क्षत्रिय और बनिया वर्ग – के बीच असंतोष है। पार्टी को डर है कि अगर यही हाल रहा तो 2027 के विधानसभा चुनाव में नुकसान हो सकता है।
गुजरात के मुख्यमंत्री खुद हटना चाहते हैं
गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वे दोबारा मुख्यमंत्री बनने के इच्छुक नहीं हैं। ऐसे में पार्टी वहां भी नए चेहरे की तलाश में है।
धामी पर भ्रष्टाचार के आरोप, अमित शाह की नजदीकी बनी ढाल
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के खिलाफ भ्रष्टाचार बढ़ने की शिकायतें हैं। हालांकि वे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीबी माने जाते हैं, इसलिए उनके मामले में जल्दबाज़ी नहीं की जा रही है। बताया जा रहा है कि पार्टी वहां एक और आंतरिक सर्वे कराने जा रही है।
प्रमोद सावंत के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर
गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत के खिलाफ सत्ता विरोधी माहौल की बात कही जा रही है। उनके प्रदर्शन से पार्टी पूरी तरह संतुष्ट नहीं है, और वहां भी नेतृत्व परिवर्तन पर मंथन चल रहा है।
भजनलाल शर्मा और मोहन माझी को मिल सकता है और वक्त
राजस्थान के भजनलाल शर्मा और ओडिशा के मोहन माझी को लेकर पार्टी का रुख थोड़ा नरम बताया गया है। सूत्रों के मुताबिक, इन्हें थोड़ा और समय दिया जा सकता है।
2027 चुनाव से पहले नेतृत्व बदलाव की तैयारी
इस पूरे घटनाक्रम को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है कि भाजपा 2027 से पहले ही कई राज्यों में नेतृत्व बदलाव की तैयारी में है, ताकि सत्ता विरोधी लहर को रोका जा सके और जातीय संतुलन साधा जा सके।