मेरठ-सहारनपुर खंड की दोनों सीटों पर भाजपा ने फिर जीत कर दर्ज कर अपने वोट बैंक को मजबूत किया है। विधानसभा चुनाव के फाइनल से पहले हुए क्वार्टफाइनल में दोनों सीटों पर फिर से खिले कमल के फूल ने यह संदेश दिया है कि युवा, शिक्षकों और बुद्धिजीवियों की पहली पंसद भाजपा है। हालांकि शर्मा गुट के इस मजबूत किले को ध्वस्त करने में भाजपा को लंबा सफर तय करना पड़ा था और 2020 में शिक्षक और स्नातक सीटों पर जीत दर्ज करने के बाद भाजपा ने पीछे मुड़कर नहीं देखा है। हालांकि ‘ककारोच पार्टी’ की घेराबंदी के बाद भी भाजपा ने किसान और जातिगत राजनिति से अलग हटकर मध्यम वर्ग, शिक्षकों, सरकारी कर्मचारियों और युवा स्नातकों के बीच अपने मजबूत वोट बैंक पर पकड़ बनाने में सफल रही।
नया सियासी इतिहास रचा
मेरठ-सहारनपुर खंड की शिक्षक और स्नातक सीटें हमेशा से वेस्ट यूपी की सियासत की नब्ज तय करने वाली मानी जाती रही हैं। वर्ष 2020 में आयोजित एमएलसी चुनाव में भाजपा ने मेरठ-सहारनपुर खंड की शिक्षक और स्नातक सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज कर एक नया सियासी इतिहास रचा था और दोनों सीटों पर ओम प्रकाश शर्मा गुट के युग का अंत किया था। बता दे कि मेरठ-सहारनपुर खंड की दोनों सीटों पर कई दशकों से माध्यमिक शिक्षक संघ (शर्मा गुट) के वरिष्ठ नेता और शिक्षकों के हितेषी ओम प्रकाश शर्मा का एकछत्र राज था, जो 48 वर्षों तक रहा, लेकिन करोनो काल यानि वर्ष-2020 के चुनाव में भाजपा के श्रीचंद शर्मा ने ओम प्रकाश शर्मा को करारी शिकस्त देकर इस ऐतिहासिक किले को ध्वस्त कर दिया और पहली बार भाजपा का परचम इन दोनों सीटों पर लहराया था। स्नातक सीट पर भाजपा प्रत्याशी दिनेश गोयल ने बड़े अंतर से जीत दर्ज कर पार्टी की पैठ को शिक्षित मतदाताओं के बीच और मजबूत कर संकेत दिया था कि भविष्य में शिक्षक भाजपा के साथ रहेंगे और 2026 के स्नातक सीट पर हुए मतदान के बाद आए रिजल्ट ने यह साबित कर दिया।
भाजपा की जीत का प्रमुख कारण
वर्ष-2020 में शर्मा गुट का किला ध्वस्त करने के बाद भाजपा ने धरातल पर काम किया और भाजपा नेताओं ने खुद को विधानसभा या लोकसभा चुनाव तक सीमित नहीं रखा, बल्कि स्नातक और शिक्षक (एमएलसी) चुनावों के लिए भी बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं के वोट बनवाने, मतदान वाले दिन मतदाताओं को घर से निकालने का काम कैडर बेस भाजपा पार्टी के नेताओं ने किया और मतदाताओं को बूथ तक लाने के लिए पूरी ताकत झोंक दी थी। भाजपा नेताओं ने अन्य शिक्षक संघों के पारंपरिक प्रभाव को तोड़ने के लिए जनता के बीच जाकर राष्ट्रीय मुद्दों, डबल इंजन सरकार के विकास दावों और पेंशन-वेतन संबंधी सरकारी नीतियों का अपने पक्ष में प्रचार प्रसार कर वेस्ट यूपी के भाजपा से भटक रहे वोट बैंक को साधा और इसका परिणाम मंगवार को शिक्षक और स्नानतक सीट के भाजपा के पक्ष में आए परिणामों ने साबित किया।
विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा ने वेस्ट यूपी में जीता क्वार्टर फाइनल
यूपी की राजनिती में वेस्ट यूपी के मतदाताओं का अहम रोल रहता है और यहां के मतदाताओं के रुझान के बाद ही किसी पार्टी की सरकार यूपी की सत्ता में आती है। लिहाजा भाजपा ने वर्ष-2027 में होने वाले विधानसभा चुनाव के फाइनल मुकाबले से पहले मेरठ-सहारनपुर खंड की शिक्षक और स्नातक सीट का क्ववार्टर फाइनल जीतने के लिए पूरी ताकत झोंक थी, क्योंकि इन दोनों सीटों पर नौ जिले मेरठ, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली, बागपत, बुलंदशहर और गाजियाबाद जैसे वेस्ट यूपी के महत्वपूर्ण जिले के मतदाता अपने मताधिकारों का प्रयोग करते है। इसलिए दोनों सीटों पर फिर से खिला कमल का फूल बुद्धिजीवी वर्ग के राजनीतिक रुझान को दर्शा रहा है कि वह भाजपा के साथ है। राजनीतिक दृष्टिकोण से भी यह साबित होता है कि भाजपा ने पारंपरिक किसान, जातिगत राजनीति से हटकर मध्यम वर्ग, शिक्षकों, सरकारी कर्मचारियों और युवा स्नातकों के बीच एक मजबूत वोट बैंक तैयार कर लिया है। इन परिणामों ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में चल रहे अटकलों के बादलों को साफ कर दिया है।