Post Poll Action--- दतिया विधानसभा उपचुनाव में मिली हार के बाद भारतीय जनता पार्टी ने संगठनात्मक स्तर पर बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर दतिया जिले की मौजूदा कार्यकारिणी को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है। उपचुनाव परिणामों की समीक्षा के लिए गठित समिति की अनुशंसा के आधार पर यह फैसला लिया गया है। इसे चुनावी नतीजों के बाद संगठन की पहली बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है।
प्रदेश नेतृत्व के निर्देश पर हुई कार्रवाई
मध्यप्रदेश भाजपा ने दतिया जिला संगठन को भंग करने का निर्णय प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के निर्देश पर लिया है। पार्टी की ओर से जारी जानकारी में बताया गया कि उपचुनाव परिणामों की समीक्षा के लिए बनाई गई समिति की रिपोर्ट के आधार पर वर्तमान संगठनात्मक ढांचे को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया गया है। इसके साथ ही जिले में नए संगठनात्मक गठन की प्रक्रिया का रास्ता भी साफ हो गया है।
हार के बाद शुरू हुआ मंथन
दतिया उपचुनाव के नतीजे सामने आने के बाद भाजपा के भीतर लगातार समीक्षा का दौर चल रहा था। चुनाव परिणामों के बाद संगठन के अंदर भितरघात और अनुशासनहीनता को लेकर भी चर्चाएं तेज हो गई थीं। इसी बीच प्रदेश अध्यक्ष ने स्पष्ट किया था कि पूरे मामले की समीक्षा के बाद जिम्मेदारी तय की जाएगी और आवश्यक होने पर अनुशासनात्मक कार्रवाई भी की जाएगी।
प्रदेश अध्यक्ष ने दिए थे सख्त संकेत
चुनावी नतीजों के बाद प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा था कि पार्टी जनता के जनादेश का सम्मान करती है। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परिणामों की विस्तृत समीक्षा की जाएगी और जो तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की रणनीति तय होगी। उनके बयान के बाद से ही संगठनात्मक बदलाव की संभावना जताई जा रही थी।
लगातार दूसरी बार नहीं जीत सकी भाजपा
दतिया विधानसभा उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी घनश्याम सिंह ने भाजपा उम्मीदवार आशुतोष तिवारी को 6,029 मतों के अंतर से पराजित किया। इससे पहले भी यह सीट कांग्रेस के कब्जे में थी। लगातार दूसरी हार ने भाजपा के लिए राजनीतिक चुनौती बढ़ा दी है। उपचुनाव के दौरान उम्मीदवार चयन को लेकर भी पार्टी के भीतर असंतोष देखने को मिला था, जिसके चलते कई स्थानों पर विरोध प्रदर्शन की स्थिति बनी थी।
आगे संगठन में हो सकते हैं नए बदलाव
जिला कार्यकारिणी भंग होने के बाद अब नए संगठनात्मक ढांचे के गठन पर पार्टी का फोकस रहेगा। माना जा रहा है कि चुनावी समीक्षा के आधार पर भविष्य की रणनीति तैयार की जाएगी और संगठन को नए सिरे से मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए जाएंगे।