लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले योगी सरकार महिला मतदाताओं से जुड़े फैसलों का दायरा बढ़ाने की तैयारी में है। आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के मानदेय में 50 फीसदी वृद्धि का प्रस्ताव इसी रणनीति की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने कार्यकर्ताओं का मानदेय आठ हजार से बढ़ाकर 12 हजार और सहायिकाओं का चार हजार से बढ़ाकर छह हजार रुपये प्रतिमाह करने का प्रस्ताव तैयार किया है। वित्त, कार्मिक और न्याय विभाग से सहमति मिलने के बाद अब इसे कैबिनेट के समक्ष रखा जा सकता है।
प्रस्ताव लागू होने पर प्रदेश की करीब 1.89 लाख आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और 1.67 लाख सहायिकाओं को लाभ मिलेगा। यानी करीब 3.56 लाख महिलाओं को सीधे आर्थिक लाभ पहुंचेगा। खास बात यह है कि बढ़े हुए मानदेय का अतिरिक्त खर्च केंद्र के बजाय राज्य सरकार स्वयं उठाएगी। इससे सरकारी खजाने पर सालाना तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक का अतिरिक्त वित्तीय भार आने का अनुमान है।
बिहार के चुनाव ने दिखाया महिला मतदान का महत्व
भाजपा के लिए बिहार विधानसभा चुनाव का अनुभव यूपी की रणनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में महिलाओं का मतदान प्रतिशत 71.6 रहा, जबकि पुरुषों का मतदान 62.8 प्रतिशत था। कुल मतदान 66.91 प्रतिशत दर्ज हुआ। 2020 के मुकाबले महिला मतदान में करीब 12 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी हुई। चुनावी नतीजों के बाद महिला मतदाताओं की बढ़ी भागीदारी और महिलाओं के लिए चलाए गए कल्याणकारी कार्यक्रमों को एनडीए की रणनीति के महत्वपूर्ण हिस्सों के तौर पर देखा गया।
यूपी में भी भाजपा के सामने महिला मतदाता बड़ा चुनावी वर्ग हैं। प्रदेश के कुल मतदाताओं में महिलाओं की हिस्सेदारी करीब 45 प्रतिशत है। ग्रामीण क्षेत्रों में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की बड़ी संख्या सरकार की योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन से जुड़ी है। इसलिए मानदेय बढ़ाने के प्रस्ताव का असर केवल लाभार्थियों तक सीमित न रहकर उनके परिवारों और स्थानीय सामाजिक नेटवर्क तक पहुंचने की संभावना है।
महिलाओं के लिए लगातार फैसले
योगी सरकार ने हाल के दिनों में महिलाओं को सीधे लाभ पहुंचाने वाले कई फैसलों पर जोर दिया है। 60 वर्ष से अधिक उम्र की महिलाओं के लिए राज्य परिवहन निगम की बसों में निशुल्क यात्रा की व्यवस्था की गई है। इसके अलावा महिला वर्ग से जुड़ी आर्थिक सहायता और कल्याणकारी योजनाओं के विस्तार को लेकर भी सरकार स्तर पर चर्चाएं चल रही हैं।
दूसरी ओर समाजवादी पार्टी भी 2027 के चुनाव को देखते हुए महिला मतदाताओं के लिए आर्थिक सहायता से जुड़े वादे सामने ला रही है। ऐसे में भाजपा के लिए महिला कल्याण योजनाओं का विस्तार केवल सरकारी कार्यक्रमों तक सीमित नहीं, बल्कि चुनावी रणनीति का भी हिस्सा बनता जा रहा है।
मानदेय में राज्य की हिस्सेदारी बढ़ेगी
वर्तमान व्यवस्था में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को मिलने वाले आठ हजार रुपये में केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 4500 और राज्य की 3500 रुपये है। प्रस्ताव के मुताबिक राज्य सरकार अपना अंश बढ़ाकर 5500 रुपये करेगी। इससे कुल मानदेय 12 हजार रुपये हो जाएगा। सहायिकाओं के मामले में भी राज्य की हिस्सेदारी बढ़ाकर कुल मानदेय छह हजार रुपये करने का प्रस्ताव है।
2027 के चुनाव से पहले महिला मतदाताओं के बीच भाजपा और विपक्ष दोनों की सक्रियता बढ़ रही है। ऐसे में आंगनबाड़ी मानदेय वृद्धि सहित महिला-केंद्रित योजनाओं का विस्तार योगी सरकार की चुनावी रणनीति में कितना असर डालता है, यह अगले विधानसभा चुनाव में देखने को मिलेगा।