मध्य प्रदेश बीजेपी ने एक अहम फैसला लेते हुए कार्यकारिणी में नेताओं के परिजनों की भागीदारी पर रोक लगा दी है। नए फॉर्मूले के तहत एक ही परिवार से केवल एक सदस्य को कार्यकारिणी का पद दिया जाएगा। हाल ही में शिकायत मिलने के बाद प्रदेश नेतृत्व ने पूर्व केंद्रीय मंत्री, कैबिनेट मंत्री और पूर्व विधानसभा अध्यक्ष के परिजनों को कार्यकारिणी से हटाने का बड़ा एक्शन लिया है।
कार्यकारिणी से बाहर किए गए नेता परिजन
मध्य प्रदेश बीजेपी में बड़े बदलाव की शुरुआत हो चुकी है। अब तक कई नेताओं के रिश्तेदार जिला कार्यकारिणी में पदाधिकारी बनाए गए थे। लेकिन इन पर सवाल उठने के बाद प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के संज्ञान में यह मामला आया। जांच के बाद कार्रवाई करते हुए निम्न प्रमुख परिजनों को
कार्यकारिणी से हटाया गयाए
पूर्व केंद्रीय मंत्री फग्गन सिंह कुलस्ते की बहन
कैबिनेट मंत्री संपतिया उइके की बेटीपूर्व विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम के बेटे
इन तीनों नेताओं से इस्तीफा मांगा गया, जिन्हें निजी कारण बताकर इस्तीफा देना पड़ा।
प्रदेश कार्यकारिणी में भी लागू होगा यह फॉर्मूला
सूत्रों की मानें तो यह नियम केवल जिला कार्यकारिणी तक सीमित नहीं रहेगा। आगामी समय में प्रदेश कार्यकारिणी में भी ‘एक परिवार, एक पद’ फॉर्मूला लागू किया जाएगा। इससे वर्तमान में मंत्री, सांसद और विधायक पदाधिकारी के रूप में कार्यरत परिजनों की स्थिति पर भी प्रभाव पड़ेगा। वर्तमान में प्रदेश कार्यकारिणी में सात सांसद, एक कैबिनेट मंत्री, छह विधायक, 14 प्रदेश उपाध्यक्ष, पांच महामंत्री और 13 प्रदेश मंत्री शामिल हैं। जल्द ही नए नियम के अनुसार इसमें भी बदलाव संभव है।
उद्देश्य और भविष्य की दिशा
इस नए फॉर्मूले का उद्देश्य पार्टी कार्यकारिणी में परिवारवाद और सांठगांठ को रोकना है ताकि कार्यकर्ताओं को बेहतर प्रतिनिधित्व मिल सके। इससे पार्टी की संरचना और लोकतांत्रिक कार्य प्रणाली को मज़बूती मिलेगी। साथ ही यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही को बढ़ावा देने में सहायक माना जा रहा है। भविष्य में अन्य राज्यों में भी इसी तरह के कदम उठाए जाने की संभावना जताई जा रही है।