2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने "पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक" यानी PDA फॉर्मूले पर काम किया और बड़ी चुनावी जीत हासिल की. बीजेपी को इस रणनीति के आगे हार का सामना करना पड़ा. अब 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले बीजेपी इस गलती को दोहराने के मूड में नहीं है. PDA के जवाब में बीजेपी ने अपना फॉर्मूला गढ़ लिया है. पार्टी ने "सांस्कृतिक राष्ट्रवाद" और "अध्यात्म" को आधार बनाकर हिंदुत्व के एजेंडे को धार देने की तैयारी कर ली है. इसका उद्देश्य सिर्फ धार्मिक भावनाओं को जगाना नहीं बल्कि जातीय समीकरण को भी साधना है.
अहिल्याबाई जन्मशती अभियान बना आधार
बीजेपी अहिल्याबाई होलकर की जन्मशती के बहाने उत्तर प्रदेश में बड़ी रणनीति पर काम कर रही है. प्रदेश की 8135 न्याय पंचायतों में 2.7 लाख कार्यकर्ताओं की टीम उतारी गई है. इसमें संगठन और सरकार दोनों के लोग शामिल हैं.
पाल और धनगर वोट बैंक पर नजर
इस अभियान के जरिए बीजेपी यूपी के पाल और धनगर समाज को साधने की कोशिश कर रही है, जो एक मजबूत वोट बैंक माने जाते हैं. इस रणनीति के जरिए पार्टी समाजवादी पार्टी के PDA फॉर्मूले को कमजोर करने का इरादा रखती है.
2027 की सियासी जंग में बीजेपी की नई चाल
बीजेपी के इस नए प्लान से साफ है कि वह अब जातीय राजनीति को धार्मिक-सांस्कृतिक रंग देने जा रही है. अहिल्याबाई अभियान सिर्फ श्रद्धा नहीं, बल्कि वोट बैंक की रणनीति भी है, जो यूपी की सियासी तस्वीर बदल सकती है.