भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बुधवार को विपक्ष पर ‘रेजीम चेंज’ यानी सत्ता परिवर्तन के नैरेटिव को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। भाजपा ने दावा किया कि इस अभियान के पीछे कुछ अज्ञात और संदिग्ध विदेशी ताकतें हैं, जो भारत में हिंसा भड़काने की कोशिश कर रही हैं। भाजपा की यह प्रतिक्रिया विपक्ष के कई नेताओं, खासकर शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे की ओर से ‘रेजीम चेंज’ के मुद्दे को उठाने और इसे अपरिहार्य बताने के बाद आई है।
इस मुद्दे पर सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्ष के बीच राजनीतिक टकराव तेज हो गया है। दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है, लेकिन कुछ ताकतें देश की इस प्रगति से खुश नहीं हैं।
ताकतें देश के भीतर और बाहर दोनों जगह मौजूद
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत लगातार प्रगति कर रहा है और वैश्विक मंच पर अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। कुछ ताकतें इस विकास से खुश नहीं हैं। ये ताकतें देश के भीतर और बाहर दोनों जगह मौजूद हैं और इनके बीच स्पष्ट गठजोड़ दिखाई देता है। यूरोप में हो रहे प्रदर्शनों का जिक्र करते हुए त्रिवेदी ने कहा कि इन घटनाक्रमों से तस्वीर भारतीय नागरिकों के सामने और स्पष्ट हो रही है।
देश को अस्थिर करने की कोशिश
भाजपा सांसद ने विजयादशमी के अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी के संबोधन का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने भ्रष्टाचार, समाज में विभाजन और भारतीय संस्कृति एवं धर्म के विरोध के जरिए देश को अस्थिर करने की कोशिश करने वाली ताकतों के प्रति आगाह किया था। त्रिवेदी ने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें सत्ता में आने के बाद लूट, समाज में विभाजन और भारतीय संस्कृति व धर्म के विरोध की राजनीति करती हैं। उन्होंने सनातन धर्म को समाप्त करने की मांग वाले सम्मेलनों, हिंदुत्व को खत्म करने के अभियानों और भारतीय संस्थानों के बारे में भ्रामक नैरेटिव फैलाने का भी आरोप लगाया।
भाजपा प्रवक्ता ने त्योहारों के मौसम में हो रहे प्रदर्शनों के कारण कारोबारियों और व्यापारियों को कथित तौर पर हो रहे आर्थिक नुकसान पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि त्योहारों का समय आमतौर पर व्यापार और मुनाफे के लिहाज से महत्वपूर्ण होता है, लेकिन कुछ ताकतें भारत को आगे बढ़ते हुए नहीं देखना चाहतीं।
शब्दों तथा नारों को समझने की जरूरत
त्रिवेदी ने रामायण का उदाहरण देते हुए कहा कि रावण के दस सिर थे और एक सिर काटने पर दूसरा सामने आ जाता था। उन्होंने कहा कि इसी तरह कुछ आंदोलनों में एक मांग पूरी होने के बाद दूसरी मांग सामने आ जाती है। उनके मुताबिक, इन आंदोलनों के पीछे के मूल कारणों और उनमें बार-बार इस्तेमाल होने वाले शब्दों तथा नारों को समझने की जरूरत है।