नोएडा| विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद के संस्थापक राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं राजस्थान तथा हिमाचल प्रदेश के पूर्व राज्यपाल पंडित कलराज मिश्रा ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा हाल ही में अधिसूचित "Promotion of Equity in Higher Education Institutions Regulations, 2026" (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता संवर्धन विनियम, 2026) को तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने देश भर में इन विनियमों का विरोध करने वालों से अपील की कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखें तथा हर जिले में जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) के माध्यम से अपना ज्ञापन सौंपें।
मिश्रा ने नोएडा स्थित आवास पर प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, "ये नियम संविधान की मूल भावना, न्याय और सामाजिक समरसता के विरुद्ध हैं। शिक्षण संस्थानों में समानता सुनिश्चित करना जरूरी है, लेकिन एक विशेष वर्ग को सदैव संदेह के घेरे में रखकर निगरानी और अनुशासनात्मक टीमों का गठन असंवैधानिक है और समाज में विभाजन पैदा करता है।"
उन्होंने UGC के 2012 के पुराने नियमों का जिक्र करते हुए कहा कि उनमें शिकायत निवारण सभी के लिए समान और निष्पक्ष था, बिना किसी पूर्वाग्रह के।उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले का हवाला दिया, जिसमें जांच प्रक्रिया को निष्पक्ष बनाने और झूठी शिकायतों से निर्दोषों की गरिमा की रक्षा पर जोर दिया गया था।
मिश्रा ने कहा, "परिषद का उद्देश्य ब्राह्मण समाज को केंद्र बनाकर पूरे समाज में सामाजिक समरसता स्थापित करना है। ये नियम इसके विपरीत कार्य करते हैं।"
उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लेख करते हुए इन नियमों को मूल अधिकारों का उल्लंघन बताया।
इस दौरान रखी गई परिषद की प्रमुख मांगें:
इन विनियमों को तत्काल वापस लिया जाए, अथवा जाति-आधारित एकतरफा दंडात्मक प्रावधानों को पूरी तरह हटाया जाए।
शिकायत निवारण प्रणाली सभी वर्गों (विद्यार्थी, शिक्षक एवं अन्य स्टाफ) के लिए समान, निष्पक्ष और पारदर्शी बनाई जाए।
सभी वर्गों का प्रतिनिधित्व वाली शिकायत निवारण समिति गठित की जाए।
झूठी शिकायत करने वालों के खिलाफ सजा का प्रावधान किया जाए।
मिश्रा ने भारत सरकार से इन नियमों की समीक्षा और शीघ्र संशोधन की अपील की तथा चेतावनी दी कि न्याय के नाम पर किसी वर्ग का दमन बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
इस बीच, परिषद के प्रतिनिधिमंडल ने शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा। प्रतिनिधिमंडल में गौतमबुद्ध नगर के सांसद डॉ महेश शर्मा, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष सतीश शर्मा, अंतर्राष्ट्रीय उपाध्यक्ष केके शर्मा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष माधव शर्मा, राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष शरद शर्मा, राष्ट्रीय प्रचार प्रमुख अरविंद भारद्वाज, दिल्ली प्रदेश युवा प्रमुख हरीश शर्मा सहित अन्य शामिल थे।
ये UGC नियम 13 जनवरी 2026 को अधिसूचित किए गए थे, जो 2012 के फ्रेमवर्क की जगह लेते हैं। इनमें Equal Opportunity Centres (EOCs), Equity Committees का गठन अनिवार्य है, जिसमें SC/ST/OBC/PwD/महिलाओं का प्रतिनिधित्व सुनिश्चित है। उद्देश्य समावेशी कैंपस बनाना है, लेकिन विरोधी इसे एकतरफा और दुरुपयोग की आशंका वाला बता रहे हैं। देशभर में विरोध तेज है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं, प्रदर्शन और इस्तीफे शामिल हैं। विश्व ब्राह्मण कल्याण परिषद के संस्थापक अध्यक्ष कलराज मिश्रा ने कहा कि वे अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखते रहेंगे। उन्होंने उम्मीद जाहिर की है सरकार इस मुद्दे पर जरूर जनभावनाओं के अनुरूप अपना फैसला रखेगी।