लोक संगीत से लोगों के दिलों में खास जगह बना चुकीं मैथिली ठाकुर अब राजनीति की पिच पर उतरने की तैयारी में हैं। खबर है कि वे भाजपा (BJP) के टिकट पर बिहार विधानसभा चुनाव लड़ सकती हैं। हाल ही में बीजेपी नेताओं से मुलाकात के बाद इस चर्चा ने और जोर पकड़ लिया है। मैथिली ठाकुर ने खुद भी कहा कि अगर उन्हें राजनीति में मौका मिला तो यह उनके लिए “बड़ी जिम्मेदारी और गर्व की बात” होगी।
बीजेपी नेताओं से मुलाकात के बाद तेज हुई चर्चा
जबलपुर में आयोजित नर्मदा महोत्सव में शामिल होने आईं मैथिली ठाकुर ने जब यह बयान दिया तो बिहार की सियासत में हलचल मच गई। बताया जा रहा है कि उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावडे और गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय से मुलाकात की है। इसके बाद से राजनीतिक गलियारों में उनके चुनावी मैदान में उतरने की चर्चा और तेज हो गई है।
“राजनीति में आई तो लोगों की मदद पर रहेगा फोकस”
मैथिली ठाकुर ने कहा, “अगर राजनीति में आती हूं तो मेरा मकसद लोगों की मदद करना होगा। मैं चाहती हूं कि अपने समाज, अपने बिहार के लोगों के लिए कुछ कर सकूं।”
उन्होंने आगे कहा, “मैं हर उम्र और तबके के लोगों से जुड़ पाती हूं, इसलिए अगर मौका मिला तो पूरी ईमानदारी से लोगों की सेवा करूंगी।”
लोक संस्कृति से सियासत तक का सफर
मैथिली ठाकुर का नाम लोक संगीत, मैथिली गीतों और लोक परंपरा को नई पहचान दिलाने के लिए जाना जाता है। उन्होंने सोशल मीडिया और मंचों के जरिए बिहार की लोकसंस्कृति को देशभर में लोकप्रिय बनाया। अब अगर वे राजनीति में आती हैं, तो यह लोक-संस्कृति से लोक-सेवा की ओर एक बड़ा कदम होगा।
बिहार चुनाव में नया चेहरा बन सकती हैं मैथिली
बीजेपी बिहार में इस बार नए और युवा चेहरों को मौका देने की रणनीति पर काम कर रही है। पार्टी के रणनीतिकारों का मानना है कि मैथिली ठाकुर जैसी लोकप्रिय और साफ-सुथरी छवि वाली हस्ती जनता के बीच अच्छा संदेश दे सकती हैं। हालांकि, पार्टी ने अभी तक आधिकारिक तौर पर कुछ नहीं कहा है, लेकिन संकेत साफ हैं कि उनकी एंट्री बस औपचारिक घोषणा भर की देर है।
बिहार की सियासत में संगीत का नया सुर
अगर मैथिली ठाकुर चुनावी मैदान में उतरती हैं, तो बिहार की राजनीति में यह पहली बार होगा जब एक लोकगायिका जनता के दिलों से सीधे जुड़ने की कोशिश करेगी। उनके आने से बिहार की सियासत में संस्कृति, संवेदना और सेवा का नया संगम देखने को मिल सकता है।