BJP UP Election : उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले भारतीय जनता पार्टी ने अपने मौजूदा विधायकों के प्रदर्शन और जनस्वीकृति का आकलन करने के लिए व्यापक आंतरिक सर्वे कराया है। सूत्रों के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, पार्टी को करीब 125 से 128 सीटों पर अपने ही विधायकों के खिलाफ नाराजगी के संकेत मिले हैं। यही वजह है कि कई मौजूदा विधायकों के टिकट बदलने की चर्चा तेज हो गई है। इस रिपोर्ट ने पार्टी संगठन और राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
2024 के नतीजों से सबक
लोकसभा चुनाव 2024 में उत्तर प्रदेश में अपेक्षा से कम प्रदर्शन के बाद बीजेपी कोई जोखिम लेने के मूड में नहीं दिख रही। पार्टी नेतृत्व चाहता है कि विधानसभा चुनाव से पहले स्थानीय स्तर पर मौजूद असंतोष को कम किया जाए। इसी रणनीति के तहत विधायकों की लोकप्रियता, जनता से जुड़ाव और संगठनात्मक सक्रियता का मूल्यांकन कराया गया। माना जा रहा है कि पार्टी एंटी इनकंबेंसी वाले चेहरों की जगह नए उम्मीदवारों को मौका दे सकती है।
किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा असर?
सूत्रों के मुताबिक पश्चिम क्षेत्र की 71 सीटों में 23 से 25 विधायकों के टिकट बदल सकते हैं। ब्रज क्षेत्र की 65 सीटों में 24 से 26 टिकट प्रभावित हो सकते हैं। अवध क्षेत्र में 82 सीटों पर 26 से 28 विधायकों को चुनौती का सामना करना पड़ सकता है। कानपुर क्षेत्र की 52 सीटों में 22 से 24, काशी क्षेत्र की 72 सीटों में 19 से 21 और गोरखपुर क्षेत्र की 62 सीटों में 18 से 22 टिकटों पर बदलाव की संभावना जताई जा रही है। हालांकि पार्टी की ओर से अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
हैट्रिक लगाने की चुनौती
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में बीजेपी लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी का लक्ष्य लेकर चल रही है। 2022 में पार्टी ने सहयोगियों के साथ मिलकर 273 सीटें जीती थीं। यह उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा रिकॉर्ड माना गया था। अब पार्टी उसी प्रदर्शन को दोहराने के लिए संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर सक्रिय दिखाई दे रही है।
विपक्ष भी पूरी तैयारी में
समाजवादी पार्टी और कांग्रेस लोकसभा चुनाव के बाद बढ़े उत्साह के साथ मैदान में हैं। अखिलेश यादव पीडीए रणनीति को आगे बढ़ा रहे हैं, जबकि कांग्रेस भी अपना जनाधार मजबूत करने में जुटी है। ऐसे में बीजेपी किसी भी सीट पर स्थानीय नाराजगी को नजरअंदाज नहीं करना चाहती। यही कारण है कि उम्मीदवार चयन को लेकर इस बार ज्यादा सतर्कता बरती जा रही है।
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टिकट कटे तो बढ़ सकती है चुनौती
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि बड़ी संख्या में टिकट बदलना बीजेपी के लिए अवसर और चुनौती दोनों साबित हो सकता है। नए चेहरों से एंटी इनकंबेंसी का असर कम हो सकता है, लेकिन लंबे समय से सक्रिय विधायकों की नाराजगी भी सामने आ सकती है। ऐसे में पार्टी नेतृत्व के सामने संतुलन बनाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। 2027 का चुनाव सिर्फ सत्ता बचाने का नहीं, बल्कि 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले राजनीतिक ताकत दिखाने का भी महत्वपूर्ण मुकाबला माना जा रहा है।