BJP MLA found guilty: दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने बिहार के साहिबगंज से बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह को वर्ष 2018 की न्यू ईयर पार्टी में हुई फायरिंग के मामले में दोषी करार दिया है। अदालत ने उन्हें गैर इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी मानते हुए तत्काल हिरासत में लेने का आदेश दिया है। वहीं उनकी पत्नी रेणु सिंह सहित अन्य दो आरोपियों को सबूतों के अभाव में सभी आरोपों से बरी कर दिया गया है। अदालत अब 9 जून को सजा की अवधि पर अंतिम फैसला सुनाएगी।
न्यू ईयर समारोह के दौरान हुई थी दर्दनाक घटना
यह मामला 31 दिसंबर 2018 की रात दिल्ली के मंडी गांव स्थित एक फार्म हाउस में आयोजित न्यू ईयर पार्टी से जुड़ा है। शिकायतकर्ता विकास गुप्ता के अनुसार उनकी पत्नी अर्चना गुप्ता पार्टी में डांस कर रही थीं, तभी कथित तौर पर राजू कुमार सिंह और उनके सुरक्षा कर्मी द्वारा हवाई फायरिंग की गई। कुछ ही देर बाद अर्चना अचानक घायल होकर गिर पड़ीं। उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां कई दिनों तक इलाज के बाद 3 जनवरी 2019 को उनकी मृत्यु हो गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गोली लगने से मौत की पुष्टि
एम्स में हुए पोस्टमार्टम में स्पष्ट हुआ कि अर्चना गुप्ता की मौत सिर में गोली लगने से हुई गंभीर चोट के कारण हुई थी। इसके बाद पुलिस ने मामले की जांच को और तेज किया। शुरुआती तौर पर दर्ज एफआईआर में हत्या के प्रयास और आर्म्स एक्ट की धाराएं लगाई गई थीं, लेकिन पीड़िता की मौत के बाद मामले में गंभीर धाराएं जोड़ी गईं। जांच एजेंसियों ने घटनास्थल और आरोपियों से जुड़े कई महत्वपूर्ण साक्ष्य भी जुटाए।
जांच में सामने आए सबूत और गिरफ्तारी की कहानी
पुलिस जांच में यह भी पाया गया कि घटना के बाद मौके पर मौजूद कुछ सबूतों को मिटाने का प्रयास किया गया था। घटनास्थल से इस्तेमाल किए गए कारतूस बरामद किए गए, जबकि राजू कुमार सिंह और उनके सुरक्षा कर्मी के ठिकानों से हथियार और जिंदा कारतूस भी मिले। घटना के बाद दोनों मौके से चले गए थे और बाद में उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किए गए। हालांकि मामले के दूसरे प्रमुख आरोपी और सुरक्षा कर्मी हरि सिंह की बाद में मृत्यु हो चुकी है।
9 जून को तय होगी विधायक की सजा
विशेष अदालत ने पहले ही आरोप तय करते हुए मामले की सुनवाई शुरू कर दी थी। अब अंतिम निर्णय में कोर्ट ने राजू कुमार सिंह को गैर इरादतन हत्या और आर्म्स एक्ट के तहत दोषी माना है। अदालत का कहना है कि उपलब्ध साक्ष्य और गवाहों के आधार पर दोष सिद्ध होता है। अब 9 जून को होने वाली सुनवाई में अदालत यह तय करेगी कि दोषी विधायक को कितनी सजा दी जाएगी। यह फैसला राजनीतिक और कानूनी दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।