मध्यप्रदेश के पचमढ़ी में 14 जून से शुरू हो रहा भाजपा का तीन दिवसीय सांसद-विधायक प्रशिक्षण सत्र केवल संगठनात्मक शिक्षा नहीं, बल्कि अनुशासन और समन्वय का पाठ भी पढ़ाएगा। पार्टी के शीर्ष नेतृत्व—केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा—खुद इस सत्र में भाग लेकर जनप्रतिनिधियों को पार्टी की रीति-नीति के अनुसार आचरण और संवाद का पाठ पढ़ाएंगे। यह सत्र ऐसे समय में हो रहा है जब पार्टी को कई बड़बोले नेताओं और असंतुष्ट विधायकों के बयानों से शर्मिंदगी उठानी पड़ी है। ऐसे में प्रशिक्षण के बहाने नेतृत्व इन नेताओं को स्पष्ट संदेश देने की तैयारी में है कि अब अनुशासनहीनता और बेतुके बयानों के लिए कोई जगह नहीं होगी।
14 जून से पचमढ़ी में तीन दिवसीय कैंप
भाजपा द्वारा 14 से 16 जून तक पचमढ़ी में आयोजित इस प्रशिक्षण सत्र में प्रदेश के सभी सांसदों और विधायकों को आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम का उद्घाटन पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा करेंगे, जो संगठनात्मक समन्वय और कार्यकर्ताओं से संवाद के तरीकों पर चर्चा करेंगे। समापन सत्र में अमित शाह ‘गुड गवर्नेंस’ और जनसेवा की दिशा में कार्यशैली को लेकर मार्गदर्शन देंगे।
प्रशिक्षण का मूल उद्देश्य: समन्वय और संवाद
इस कैंप का उद्देश्य सांसदों और विधायकों को सत्ता और संगठन के बीच समन्वय बनाकर कार्य करने की ट्रेनिंग देना है। साथ ही, जनता के बीच पार्टी की छवि को मज़बूत बनाए रखने के लिए संवाद कौशल, जमीनी स्तर पर सक्रियता और अनुशासित आचरण जैसे विषयों पर गहन चर्चा होगी।
बड़बोले नेताओं पर सख्ती तय
बीते कुछ महीनों में भाजपा के कुछ नेताओं के विवादित बयानों ने पार्टी को सार्वजनिक रूप से नुकसान पहुंचाया है। खासतौर पर मंत्री विजय शाह का मामला चर्चा में है, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय मंच पर बयानबाजी कर पार्टी को असहज किया। सूत्रों की मानें तो ऐसे नेताओं को सख्त हिदायत दी जाएगी कि वे पार्टी लाइन में रहकर ही बात करें, अन्यथा अनुशासनात्मक कार्रवाई झेलने के लिए तैयार रहें।
असंतुष्ट विधायकों को भी सिखाया जाएगा संवाद का तरीका
सत्र में उन विधायकों को भी विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी जो हाल के दिनों में पार्टी मंच के बजाय मीडिया या सार्वजनिक मंच से नाराजगी जाहिर करते नजर आए हैं। उन्हें बताया जाएगा कि असहमति पार्टी फोरम में कैसे और किस तरह से रखनी चाहिए ताकि पार्टी की छवि को नुकसान न पहुंचे।
प्रधानमंत्री पहले ही दे चुके हैं संकेत
फरवरी में भोपाल दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी प्रदेश के सांसदों और विधायकों को सख्त संदेश दिया था। उन्होंने कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में करीब दो घंटे संवाद कर जनप्रतिनिधियों से कहा था कि वे जनता से जुड़े रहें और विकास के कार्यों को प्राथमिकता दें। पीएम मोदी के इसी दृष्टिकोण को अब शाह और नड्डा प्रशिक्षण सत्र के माध्यम से ज़मीनी स्तर पर लागू कराने की कोशिश करेंगे।