मध्यप्रदेश में भारतीय जनता पार्टी संगठन ने नेताओं के लिए सख्त और अघोषित गाइडलाइन जारी की है। इसमें व्यक्तिगत प्रचार, भाई-भतीजावाद और सार्वजनिक दिखावे पर रोक जैसे अहम निर्देश शामिल हैं। पार्टी ने साफ कर दिया है कि निगम, मंडल और आयोग के पदाधिकारियों को अनुशासन की लक्ष्मण रेखा में रहना होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर पद जाने तक की चेतावनी दी गई है, जिससे राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
निजी प्रचार और दिखावे पर रोक
नई गाइडलाइन में नेताओं को व्यक्तिगत प्रचार-प्रसार से दूर रहने के निर्देश दिए गए हैं। होर्डिंग और पोस्टर लगाने पर सख्त रोक लगाई गई है। साथ ही बड़े काफिले और दिखावे वाली गतिविधियों को कम करने के लिए कहा गया है। पार्टी का कहना है कि सार्वजनिक पद पर बैठे नेताओं को सरकार और संगठन के काम को प्राथमिकता देनी चाहिए, न कि व्यक्तिगत छवि निर्माण को।
भाई-भतीजावाद और स्टाफ चयन पर सख्ती
निर्देशों में यह भी साफ किया गया है कि नेताओं को अपने रिश्तेदारों और परिचितों को सरकारी कामकाज या स्टाफ में शामिल नहीं करना है। PA और अन्य स्टाफ की नियुक्ति में भाई-भतीजावाद पर पूरी तरह रोक रहेगी। विवादित या संदिग्ध छवि वाले लोगों को भी टीम में जगह नहीं देने की सख्त हिदायत दी गई है। यह कदम पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए बताया जा रहा है।
पदाधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी
प्रदेश अध्यक्ष की ओर से निगम, मंडल और प्राधिकरण अध्यक्षों को साफ संदेश दिया गया है कि संगठन की लक्ष्मण रेखा पार करने पर पद भी जा सकता है। सरकार के कामकाज का प्रचार करने और संगठन से जुड़े कार्यकर्ताओं के काम को प्राथमिकता देने के निर्देश हैं। पार्टी ने स्पष्ट किया है कि पद सुविधा नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है और अनुशासन अनिवार्य है।
कांग्रेस का हमला और राजनीतिक बयानबाजी
इस गाइडलाइन को लेकर कांग्रेस ने भाजपा पर निशाना साधा है। कांग्रेस प्रवक्ता का कहना है कि यह सिर्फ दिखावा है और जनता इन बातों को समझ चुकी है। उनका आरोप है कि जनता महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रही है। वहीं भाजपा प्रवक्ता ने पलटवार करते हुए कहा कि पार्टी में राष्ट्रहित सर्वोपरि है और कार्यकर्ता पहले, व्यक्ति बाद में आता है। संगठन के अनुशासन पर पूरा जोर दिया जा रहा है।
संगठन का फोकस अनुशासन और राष्ट्रहित
पार्टी की ओर से यह भी स्पष्ट किया गया है कि सभी फैसलों में संगठन और राष्ट्रहित सर्वोपरि है। नेताओं को व्यक्तिगत हित छोड़कर सामूहिक लक्ष्य पर ध्यान देना होगा। कार्यकर्ताओं को भी निर्देश दिए गए हैं कि वे संगठन की नीतियों का पालन करें और किसी भी तरह की अनुशासनहीनता से बचें।