Bengal Politics : पश्चिम बंगाल की राजनीति में इन दिनों तृणमूल कांग्रेस के बागी सांसदों को लेकर चर्चाएं तेज हैं। दावा किया जा रहा था कि ममता बनर्जी का साथ छोड़ने वाले कई सांसद भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो सकते हैं। लेकिन अब भाजपा ने साफ कर दिया है कि फिलहाल ऐसे किसी भी नेता को पार्टी में शामिल करने की कोई योजना नहीं है।
शमिक भट्टाचार्य का बड़ा बयान
पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष शमिक भट्टाचार्य ने कहा कि केवल भाजपा में आने की इच्छा जताने भर से किसी को पार्टी में जगह नहीं मिल सकती। उन्होंने स्पष्ट किया कि तृणमूल कांग्रेस या एनसीपीआई से किसी सांसद के भाजपा में शामिल होने की कोई जानकारी उनके पास नहीं है। साथ ही उन्होंने कहा कि बंगाल की जनता उन नेताओं की भूमिका नहीं भूली है जो पहले तृणमूल सरकार का हिस्सा रहे हैं।
17 सांसदों के BJP में जाने की थी चर्चा
पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब बागी सांसद जगदीशचंद्र बासुनिया ने दावा किया कि दुर्गा पूजा से पहले या बाद में 17 सांसद भाजपा में शामिल हो सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि कई सांसद अयोग्यता की कार्रवाई से बचने के लिए दल बदल का रास्ता तलाश रहे हैं। इस बयान के बाद बंगाल की राजनीति में हलचल बढ़ गई थी।
निकाय चुनाव से पहले बढ़ा सियासी तापमान
यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब पश्चिम बंगाल में नगर निकाय चुनाव नजदीक हैं। राजनीतिक दल अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं और संभावित गठबंधनों को लेकर चर्चाएं भी जारी हैं। ऐसे माहौल में सांसदों के दल बदल की खबरों ने राजनीतिक गलियारों में नई बहस छेड़ दी है।
बागी सांसदों की अलग सोच
बागी गुट के कुछ नेताओं का मानना है कि वे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के साथ मिलकर चुनाव लड़ सकते हैं। वरिष्ठ नेता काकोली घोष दस्तीदार ने पहले कहा था कि उनका दल एनडीए का हिस्सा है और निकाय चुनाव में भाजपा के साथ तालमेल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि भाजपा की ताजा प्रतिक्रिया ने इन उम्मीदों को झटका दिया है।
कौन-कौन हैं बागी सांसद?
बागी सांसदों के समूह में काकोली घोष दस्तीदार, सुदीब बंदोपाध्याय, सायोनी घोष, यूसुफ पठान, शताब्दी रॉय और अबू ताहेर समेत 20 सांसदों के नाम चर्चा में हैं। हालांकि तीन मुस्लिम सांसद पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वे भाजपा में शामिल नहीं होंगे और केवल एनडीए को समर्थन दे रहे हैं।
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बंगाल की राजनीति में बढ़ी अनिश्चितता
भाजपा के स्पष्ट रुख के बाद बागी सांसदों की राजनीतिक रणनीति पर सवाल खड़े हो गए हैं। एक तरफ तृणमूल कांग्रेस से दूरी बढ़ी हुई है, तो दूसरी ओर भाजपा ने भी दरवाजे खुले नहीं रखे हैं। ऐसे में निकाय चुनाव से पहले बंगाल की राजनीति में नए समीकरण बनने की संभावना बनी हुई है।