BJP SAD Alliance Revival : शिरोमणि अकाली दल ने महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े प्रस्तावों के समर्थन का ऐलान किया है। पार्टी के इस रुख के तुरंत बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात ने पंजाब की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। दोनों नेताओं की शुक्रवार को हुई मुलाकात के बाद भले ही किसी गठबंधन की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई, लेकिन पुराने सहयोगियों के फिर करीब आने की चर्चाएं तेज हो गई हैं।
महिला आरक्षण और परिसीमन पर अकाली दल का समर्थन क्यों अहम
अकाली दल ने महिला आरक्षण को लागू करने और निष्पक्ष एवं समान परिसीमन की जरूरत का समर्थन किया है। पार्टी का यह रुख ऐसे समय सामने आया है, जब केंद्र सरकार इन मुद्दों को लेकर राजनीतिक समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही है। इसी वजह से अकाली दल के बयान को सिर्फ संसद से जुड़े रुख के तौर पर नहीं, बल्कि बदलते राजनीतिक समीकरणों के संकेत के तौर पर भी देखा जा रहा है।
मोदी-बादल की मुलाकात ने बढ़ाई गठबंधन की चर्चा
सुखबीर सिंह बादल और पीएम मोदी की मुलाकात के बाद BJP और SAD के बीच पुराने रिश्ते बहाल होने की अटकलें तेज हुई हैं। दोनों दल लंबे समय तक पंजाब की राजनीति में सहयोगी रहे थे, लेकिन 2020 में कृषि कानूनों को लेकर मतभेद के बाद अकाली दल ने एनडीए से अलग होने का फैसला किया था। अब बदले राजनीतिक माहौल में दोनों दलों के बीच दोबारा संवाद शुरू होने को अहम संकेत माना जा रहा है। हालांकि, अभी किसी भी पार्टी ने गठबंधन की औपचारिक पुष्टि नहीं की है।
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पंजाब में दोनों साथ आए तो किसे मिलेगा फायदा
अकाली दल की पंजाब में खासतौर पर ग्रामीण और पारंपरिक सिख वोटरों के बीच पकड़ मानी जाती है, जबकि बीजेपी का प्रभाव शहरी इलाकों में अधिक रहा है। ऐसे में दोनों दलों का संभावित तालमेल वोट बैंक के लिहाज से एक-दूसरे को मजबूती दे सकता है। यही वजह है कि 2027 के पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले इस संभावित गठबंधन पर राजनीतिक नजरें टिक गई हैं।
क्या फिर लौटेगा पुराना BJP-SAD गठबंधन
BJP और अकाली दल का गठबंधन पंजाब में पहले कई बार सत्ता तक पहुंच चुका है। 1997, 2007 और 2012 में दोनों दलों की गठबंधन सरकार बनी थी। लेकिन 2020 में अलग होने के बाद दोनों पार्टियों को अगले विधानसभा चुनाव में बड़ा झटका लगा। अब मोदी और बादल की मुलाकात के बाद रिश्तों में नरमी के संकेत जरूर दिखाई दे रहे हैं, लेकिन सीट बंटवारे या औपचारिक गठबंधन पर तस्वीर अभी साफ नहीं है। इसलिए फिलहाल इसे गठबंधन की घोषणा के बजाय संभावित राजनीतिक वापसी के संकेत के तौर पर ही देखा जा रहा है।