BJP UP Election 2027 : उत्तर प्रदेश में 2027 विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटी बीजेपी ने 2024 लोकसभा चुनाव के नतीजों का गहन विश्लेषण शुरू कर दिया है। पार्टी ने ऐसे 18,900 बूथों की पहचान की है, जहां 2022 विधानसभा चुनाव की तुलना में उसका प्रदर्शन कमजोर हुआ। अब इन बूथों को दोबारा मजबूत करने के लिए विशेष रणनीति तैयार की जा रही है। पार्टी इसे अपने ‘रिकवरी प्लान’ का अहम हिस्सा मान रही है।
ग्रामीण इलाकों में बढ़ी चुनौती
बीजेपी के आंतरिक आकलन के अनुसार चिन्हित बूथों में करीब 80 प्रतिशत ग्रामीण क्षेत्रों में हैं। छोटे गांवों और बिखरी बस्तियों वाले इलाकों में पार्टी का जनाधार कमजोर हुआ है। वहीं लखनऊ, वाराणसी, गोरखपुर और कानपुर जैसे शहरी क्षेत्रों में बीजेपी अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है। यही वजह है कि संगठन अब गांव-गांव तक पहुंच बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
बूथ से लेकर संगठन तक तैयारी
पार्टी की रणनीति केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं है। बूथ स्तर पर सामाजिक बदलाव, स्थानीय मुद्दों और वोटिंग पैटर्न का अध्ययन किया जा रहा है। यूपी प्रभारी विनोद तावड़े सितंबर में प्रदेश दौरे के दौरान कमजोर बूथों की समीक्षा करेंगे। संगठन को दोबारा सक्रिय कर बूथ स्तर पर मजबूत नेटवर्क खड़ा करने की योजना बनाई जा रही है।
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अवध और पूर्वांचल बने चिंता का कारण
बीजेपी के लिए सबसे बड़ी चुनौती अवध और पूर्वांचल क्षेत्र में सामने आई है। अवध में 2022 के मुकाबले 2024 में पार्टी की बढ़त वाली सीटों की संख्या में बड़ी गिरावट दर्ज हुई। अमेठी, फैजाबाद, कन्नौज, सुल्तानपुर और सीतापुर जैसे जिलों में असर ज्यादा दिखाई दिया। वहीं पूर्वांचल के जौनपुर, गाजीपुर, चंदौली और प्रयागराज के ग्रामीण इलाकों में भी पार्टी को झटका लगा।
सामाजिक समीकरण पर फोकस
पार्टी का मानना है कि गैर-यादव पिछड़ा वर्ग और गैर-जाटव दलित वोटों में बदलाव का असर कई सीटों पर दिखाई दिया। सपा के पीडीए फार्मूले और बसपा के कमजोर होने से बने नए राजनीतिक समीकरणों को भी बीजेपी गंभीरता से देख रही है। इसी वजह से सामाजिक समूहों के बीच दोबारा संवाद बढ़ाने की रणनीति बनाई जा रही है।
2027 के लिए बड़ा लक्ष्य
बीजेपी 2024 के नतीजों को सिर्फ हार नहीं बल्कि चेतावनी मान रही है। पार्टी का मानना है कि उत्तर प्रदेश का चुनाव बूथ स्तर की जीत-हार से तय होता है। इसलिए 18,900 बूथों पर फोकस कर संगठन, सामाजिक समीकरण और स्थानीय मुद्दों को साधने की कोशिश की जा रही है। 2027 में सत्ता की हैट्रिक लगाने के लिए यही रिकवरी प्लान बीजेपी की सबसे बड़ी चुनावी रणनीति माना जा रहा है।