पंजाब की राजनीति में इन दिनों हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का नाम तेजी से चर्चा में है। हरियाणा में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने के बाद भाजपा अब पंजाब में भी जमीन मजबूत करने की तैयारी में दिख रही है। अगले विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी ने अभी से रणनीति बनानी शुरू कर दी है। सैनी को लगातार पंजाब भेजा जा रहा है और उन्हें एक अहम चेहरे के रूप में पेश किया जा रहा है। इससे सियासी गलियारों में हलचल बढ़ गई है।
हरियाणा जीत का फॉर्मूला पंजाब में?
हरियाणा चुनाव में भाजपा की जीत में सैनी की सक्रिय भूमिका को अहम माना गया था। संगठन को संभालने और कार्यकर्ताओं में ऊर्जा भरने की उनकी शैली ने नेतृत्व का भरोसा बढ़ाया। अब पार्टी उसी अनुभव को पंजाब में आजमाने की सोच रही है। सैनी पंजाबी अंदाज में संवाद कर रहे हैं और स्थानीय मुद्दों को उठाकर लोगों से जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं। धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों पर उनकी मौजूदगी को भी राजनीतिक संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
पंजाब-हरियाणा का रिश्ता बना आधार
पंजाब और हरियाणा के सामाजिक और पारिवारिक रिश्ते पुराने हैं। सीमाएं साझा हैं और व्यापारिक संबंध भी मजबूत हैं। भाजपा इस जुड़ाव को राजनीतिक ताकत में बदलना चाहती है। सैनी का यह कहना कि दोनों राज्यों का रिश्ता खून का है, इसी भावना को मजबूत करने की कोशिश माना जा रहा है। पार्टी चाहती है कि हरियाणा का नेतृत्व पंजाब के साथ सहयोग और साझेदारी का संदेश दे।
सामाजिक समीकरण साधने की कोशिश
रणनीति का एक बड़ा हिस्सा सामाजिक संतुलन है। सैनी ओबीसी समुदाय से आते हैं और पंजाब में इस वर्ग की आबादी अच्छी मानी जाती है। साथ ही सिख समुदाय से जुड़ाव का संदेश भी दिया जा रहा है। भाजपा शहरी हिंदू मतदाताओं के साथ-साथ ओबीसी और अन्य वर्गों को जोड़ने की कोशिश में है। पार्टी अब बिना बड़े सहयोगी के चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी कर रही है, इसलिए नए चेहरे और नई ऊर्जा पर जोर है।
AAP पर सीधा हमला
सैनी ने कार्यक्रमों में आम आदमी पार्टी और मुख्यमंत्री भगवंत मान पर भी निशाना साधा है। उन्होंने कानून व्यवस्था और विकास के मुद्दों को उठाया है। इससे सियासी मुकाबला और तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं ने आरोप लगाए हैं कि भाजपा विधायकों को प्रभावित करने की कोशिश कर रही है, हालांकि इन दावों को खारिज किया गया है।
अब नजर चुनावी नतीजों पर
लोकसभा चुनाव में भाजपा का वोट प्रतिशत बढ़ना पार्टी के लिए उत्साहजनक माना जा रहा है। अब चुनौती इस समर्थन को विधानसभा सीटों में बदलने की है। पंजाब की राजनीति पारंपरिक रूप से क्षेत्रीय दलों और कांग्रेस के इर्द-गिर्द रही है, इसलिए मुकाबला आसान नहीं होगा। आने वाले महीनों में साफ होगा कि सैनी की सक्रियता भाजपा के लिए मास्टर स्ट्रोक साबित होती है या नहीं।