आजमगढ़ में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का अनवरगंज (कंधरापुर थाना क्षेत्र) में अपना नया घर और पार्टी कार्यालय उद्घाटन के लिए तैयार हो चुका है. मगर गृह‑प्रवेश समारोह से पहले ही ब्राह्मण समाज ने तीखा विरोध जताया. कई ब्राह्मण परिवारों ने अपने घरों पर काले झंडे लगा दिए हैं, यह विरोध विशेष रूप से इटावा की कथावाचक विवादित घटना को लेकर उनकी नाराज़गी का प्रतीक था. इस कदम को राजनीतिक चाल बताते हुए स्थानीय बीजेपी नेता हरिवंश मिश्रा और अन्य ब्राह्मण संगठनों ने आरोप लगाया कि अखिलेश यादव ने ब्राह्मण‑यादव समुदायों में दरार पैदा करने के लिए जातिगत राजनीति का सहारा लिया है. इसी बीच यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या यह घटनाक्रम आगामी विधानसभा चुनावों के समीकरणों को भी प्रभावित करेगा.
घर को नाम दिया PDA भवन
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव ने आजमगढ़ के कंधरापुर थाना क्षेत्र के अनवरगंज में 72 बिस्वा क्षेत्र में एक आधुनिक भवन तैयार कराया है. इसमें उनका निजी घर, एक बड़ा हॉल, सचिवालय कार्यालय और पार्टी का पूर्वांचल मुख्यालय शामिल है .इस भवन को “PDA भवन”** नाम दिया गया है.
यह कदम केवल उनके निजी निवास के लिए नहीं, बल्कि आगामी 2027 के विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखकर पूर्वांचल में सपा की पकड़ सुदृढ़ करने की राजनीतिक रणनीति के तहत उठाया गया है, ताकि स्थानीय मुद्दों पर सीधा संवाद स्थापित किया जा सके.
काशी के पंडितों का बहिष्कार
अखिलेश यादव ने गृह‑प्रवेश के लिए काशी के पुरोहितों को आमंत्रित किया गया, लेकिन वो इटावा में कथावाचकों पर हुई घटनाओं को लेकर नाराज़ होकर इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए. इसके बाद स्थानीय ब्राह्मण पंडितों ने विधिपूर्वक पूजा संपन्न करायी, जिसमें यादव परिवार ने भी हिस्सा लिया.
काले झंडों से जताया विरोध
इटावा में कथावाचकों के जाति छिपाने और कथित मारपीट की घटना के मद्देनज़र ब्राह्मण समाज ने सपा प्रमुख की हालिया टिप्पणियों को देशद्रोही बताया और विरोधस्वरूप अपने घरों पर काले झंडे लहराए . यह विरोध प्रमुख रूप से आजमगढ़ के ब्राह्मण‑बाहुल्य गांवों (उगर पट्टी, चेवता, बनहरा, गजहड़ा, पलथी आदि) में शांतिपूर्ण तरीके से किया गया. विरोध का स्वरूप शांतिपूर्ण था. उन्होंने केवल काले झंडे लगाए और निष्पक्ष प्रतिक्रिया की मांग की.
बीजेपी के हरिवंश मिश्रा ने आखिलेश यादव पर आरोप लगाया कि उन्होंने यादव‑ब्राह्मण समुदायों को विभाजित करने की राजनीति की, जबकि सदियों से दोनों समुदायों में गहरा आपसी संबंध रहा है. ब्राह्मण संगठनों ने कहा कि इटावा में हुई घटना दुर्भाग्यपूर्ण है, लेकिन पूरे ब्राह्मण समुदाय पर बात करना स्वीकार्य नहीं.